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हेलो डाक्‍टर : चिकित्सक की सलाह के बिना नहीं लें एंटीबायोटिक, हो सकता है नुकसान

भोपाल न्यूज़ धमाका // जल्दी स्वस्थ्य होने के फेर में लोग कई बार बाजार से एंटीबायोटिक खरीदकर खा लेते हैं। मेडिकल स्टोर वाले भी उन्हें नई जनरेशन यानी ज्यादा ताकतवर दवा देते हैं, जिससे जल्दी फायदा हो, लेकिन इससे ज्यादा नुकसान होता है। एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति लोगों में प्रतिरोधक क्षमता आने की यह बड़ी वजह है। प्रतिरोधक क्षमता कम होने का मतलब है कि इन दवाओं का असर जीवाणुओं पर कम हो जाता है, जिससे बीमारी ठीक नहीं होती। यह बात राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के संचालक डा. पंकज शुक्ला ने शनिवार को नवदुनिया ‘हेलो डाक्टर’ में फोन पर लोगों की शंकाओं का समाधान करते हुए कही। भोपाल समेत आसपास के जिलों के लोगों ने फोन कर उनसे एंटीबायोटिक के उपयोग के बारे में पूछा।

डा. शुक्ला ने कहा कि पूरी दुनिया एंटीबायोटिक दवाओं के बेअसर होने से चिंतित है। इसी कारण 18 से 24 नवंबर तक दुनिया भर में एंटीबायोटिक जागरुकता सप्ताह मनाया गया। पिछले 10 साल से कोई नई एंटीबायोटिक नहीं आई है, जबकि हर साल इन दवाओं का असर 15 से 20 फीसद तक कम हो रहा है। यह बड़ी चुनौती है।

लोगों के सवाल और डा. पंकज शुक्ला के जवाब–10 महीने का बच्चा है। सर्दी-खांसी बनी रहती हैं। क्या एंटीबायोटिक देना सही रहेगा। (पंकज यादव, बैतूल)

जवाब- डाक्टर की सलाह के बिना एंटीबायोटिक नहीं दें। साधारण सर्दी-खांसी में एंटीबायोटिक देना तो बिल्कुल ठीक नहीं है, लेकिन अगर बुखार के साथ पसली चलने या बच्चे को सांस लेने में तकलीफ हो रही हो तो एंटीबायोटिक देना पड़ेगा। पर चिकित्सक के बताए अनुसार।

बच्चे को बार-बार सर्दी-जुकाम होता है। डाक्टर हर बार एंटीबायोटिक दे देते हैं। (प्रज्ञा शर्मा, कोलार)

जवाब- बच्चों की इम्यूनिटी अच्छी होती है। कई बार उन्‍हें वायरल संक्रमण या एलर्जी से सर्दी-जुकाम हो जाता है। सांस नहीं फूल रही या बच्चा सुस्त नहीं है तो एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। साधारण पैरासिटामाल दे सकते हैं। हां, पसली चलने, सांस फूलन और तेज बुखार हो तो डाक्टर को जरूर दिखाएं।

अस्पतालों से भी संक्रमण हो सकता है क्या। (राकेश बाथम, रायसेन)

जवाब- संक्रमण के कुल मामलों में करीब 10 फीसद अस्पताल की वजह से होते हैं। इसे रोकने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इंफेक्शन प्रिवेंशन एवं कंट्रोल (आइपीसी) प्रोग्राम शुरू किया। अस्पताल में कर्मचारियों को ट्रेनिंग दी जा रही है। बायोमेडिकल वेस्ट का सही तरीके से निस्तारण करने को कहा जा रहा है। प्रदेश में भी इस दिशा में अच्छा काम हो रहा है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

चीफ एडिटर छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश सहसचिव; छत्तीसगढ़ श्रमजीवी पत्रकार संघ // जिला उपाध्यक्ष प्रेस क्लब कोंडागांव ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहला शौक//

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