छतीसगढ़दुर्ग

CHO की आत्महत्या: संविदा शोषण, मानसिक प्रताड़ना और सिस्टम की चुप्पी ने छीनी एक माँ की जान

दुर्ग न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) की आत्महत्या ने स्वास्थ्य व्यवस्था की अमानवीय हकीकत को उजागर कर दिया है। यह केवल एक कर्मचारी की मृत्यु नहीं, बल्कि एक माँ, एक विधवा, और एक संविदा कर्मी के टूटे हुए जीवन की व्यवस्था से हार है।

सिर्फ एक महीने पहले पति को खोया, अब खुद ने छोड़ा मासूम को अकेला

पीड़िता ने कुछ सप्ताह पहले ही एक सड़क दुर्घटना में अपने पति को खोया था। उस समय उसने छुट्टी की गुहार लगाई, लेकिन उच्चाधिकारियों ने यह कहकर उसे खारिज कर दिया कि “कार्यभार बढ़ जाएगा”। उस अकेली महिला को, जो एक साल के मासूम की माँ थी, दुर्ग से दूर एक स्वास्थ्य केंद्र में अकेले सेवाएं देने को विवश किया गया।

एक के बाद एक अन्याय

  • पति की मृत्यु के बाद मानसिक स्थिरता नहीं थी, फिर भी सुशासन तिहार के नाम पर शिकायतें दर्ज हुईं कि “केंद्र बंद रहता है”।
  • तीन महीने का भुगतान, केंद्र के लिए फंड, और एक महीने का वेतन रोक दिया गया।
  • स्थानांतरण की अर्जी लगातार अनसुनी की गई।
  • हाल ही में जारी TOR (Terms of Reference) में चार लोगों का काम अकेले करने का आदेश, और ऊपर से वेतन कटौती की धमकी—इन सबने उसे तोड़ दिया।

यह कोई एक घटना नहीं है

छत्तीसगढ़ राज्य एनएचएम कर्मचारी संघ और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ ने बयान जारी कर कहा:

“यह एक माँ की आत्महत्या नहीं, बल्कि व्यवस्था की हत्या है। पिछले तीन वर्षों में पाँच CHO कार्यदबाव में आत्महत्या कर चुके हैं। कब तक हम चुप रहेंगे?”


क्या मांगा गया है?

संघों ने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:

  1. मानसिक स्वास्थ्य सहायता हर संविदा स्वास्थ्य कर्मी को सुलभ कराई जाए।
  2. कार्यभार की सीमा निर्धारित हो—CHO कोई सुपरहीरो नहीं, इंसान हैं।
  3. संविदा शोषण पर ठोस नीति बने—कार्य आधारित असुरक्षा और फंड रोकने जैसे हथियार बंद हों।

सरकार की चुप्पी: सवाल उठने लाज़मी हैं

  • क्या संविदा कर्मी का कोई मूल्य नहीं?
  • क्या एक माँ, जो पति के जाने के बाद भी ड्यूटी कर रही थी, उसके लिए कोई मानवता नहीं दिखा सकता था?
  • क्या मानसिक प्रताड़ना को भी कार्य संस्कृति का हिस्सा मान लिया गया है?

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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