
14 जुलाई 2026 //
दिल्ली न्यूज़ धमाका – साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के बहुचर्चित मामले में दिल्ली की कड़कड़डूमा ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है। सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडिशनल सेशंस जज) परवीन सिंह ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुए ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया।
सोमवार को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एडिशनल सेशंस जज) परवीन सिंह ने मामले में फैसला सुनाते हुए ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी ठहराया। वहीं, 6 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों को दोषी ठहराने का यह फैसला एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष (प्रॉसीक्यूशन) ने अदालत के समक्ष 110 गवाह पेश किए थे, जिनमें से अदालत ने 91 गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों का विस्तार से परीक्षण किया। इन्हीं गवाहियों और सबूतों के आधार पर अदालत ने अपना फैसला सुनाया। यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या से जुड़ा है। इस मामले की जांच के बाद पुलिस ने ताहिर हुसैन सहित कई लोगों के खिलाफ हत्या, दंगा, आपराधिक साजिश और अन्य गंभीर धाराओं के तहत आरोपपत्र दाखिल किया था।
किन आरोपों में दोषी ठहराए गए ताहिर हुसैन?
अदालत ने इस मामले में 17 मार्च 2023 को आरोप तय किए थे। सुनवाई पूरी होने के बाद कोर्ट ने ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, जावेद और अनस को भारतीय दंड संहिता की कई गंभीर धाराओं के तहत दोषी करार दिया है। कोर्ट ने सभी आरोपियों को धारा 302 (हत्या), धारा 149 (गैरकानूनी जमावड़े के साझा उद्देश्य के तहत अपराध), धारा 148 (घातक हथियार से लैस होकर दंगा करना), धारा 147 (दंगा करना), धारा 188 (सरकारी आदेश की अवहेलना) और धारा 365 (अपहरण) के तहत दोषी ठहराया। हालांकि, अदालत ने ताहिर हुसैन को आपराधिक साजिश के आरोप से बरी कर दिया। यानी कोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर हत्या और दंगे समेत अन्य आरोपों में उन्हें दोषी माना, लेकिन आपराधिक साजिश के आरोप में दोष सिद्ध नहीं पाया।
फैसला सुनते ही अदालत में रो पड़े ताहिर हुसैन
अदालत का फैसला सुनाए जाने के बाद ताहिर हुसैन भावुक हो गए और कोर्ट में रो पड़े। खुद को निर्दोष बताते हुए उन्होंने अदालत से कहा, “मैं बेगुनाह हूं, मेरे साथ इंसाफ नहीं हुआ है।” अदालत अब दोषी ठहराए गए आरोपियों की सजा पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अलग से आदेश जारी करेगी। यानी फिलहाल अदालत ने दोष तय किया है, जबकि सजा की अवधि पर फैसला बाद में सुनाया जाएगा। वहीं, अदालत ने साक्ष्यों के अभाव में छह अन्य आरोपियों मुंतजिर उर्फ मूसा, शोएब आलम, हसीन, समीर, गुलफाम और फिरोज को सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट का कहना था कि उनके खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त सबूत उपलब्ध नहीं थे।
नाले से मिला था अंकित शर्मा का शव, 648 पन्नों की चार्जशीट हुई थी दाखिल
यह मामला 25 फरवरी 2020 का है, जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली के चांद बाग इलाके में नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के सुरक्षा सहायक अंकित शर्मा की हत्या कर दी गई थी। उनका शव अगले दिन पास के एक नाले से बरामद हुआ था। घटना के बाद अंकित शर्मा के पिता रवींद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाना में एफआईआर दर्ज की गई। मामले की जांच बाद में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई। जांच के दौरान क्राइम ब्रांच ने तत्कालीन आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन सहित 11 आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया। पुलिस ने 3 जून 2020 को अदालत में 648 पन्नों की मुख्य चार्जशीट दाखिल की थी। इसके बाद जांच के दौरान छह पूरक (सप्लीमेंट्री) चार्जशीट भी अदालत में प्रस्तुत की गईं।
‘सबूतों पर आधारित और निष्पक्ष जांच की गई’ : दिल्ली पुलिस कमिश्नर
दिल्ली पुलिस आयुक्त सतीश गोलछा, जिन्होंने 2020 के दिल्ली दंगों के दौरान स्पेशल कमिश्नर ऑफ पुलिस के रूप में जांच का नेतृत्व किया था, ने अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुलिस की पहली प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निष्पक्ष, बिना किसी भेदभाव के तथा साक्ष्यों पर आधारित जांच सुनिश्चित करना थी। उन्होंने कहा, “दिल्ली दंगों के दौरान हमारी पहली जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना और एक निष्पक्ष, बिना भेदभाव वाली तथा सबूतों पर आधारित जांच करना थी। भरोसेमंद साक्ष्य जुटाने और जिम्मेदार लोगों को कानून के सामने लाने के लिए पूरी कोशिश की गई।
