
14 जुलाई 2026 //
बिलासपुर न्यूज़ धमाका – छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में प्रेग्नेंसी के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं महिला अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है।
छत्तीसगढ़ पुलिस भर्ती में प्रेग्नेंसी के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल नहीं हो सकीं महिला अभ्यर्थियों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाईकोर्ट ने अपने पूर्व के आदेश को वापस लेते हुए कहा है कि लंबी भर्ती प्रक्रिया के दौरान गर्भवती हो जाने वाली महिला अभ्यर्थियों को फिजिकल टेस्ट स्थगित करने का अधिकार है या नहीं, इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर पहले कभी निर्णय नहीं हुआ था। इसलिए इसे पहले के फैसले से तय मानकर याचिका खारिज करना रिकॉर्ड पर स्पष्ट त्रुटि थी।
जस्टिस एके प्रसाद ने याचिका स्वीकार करते हुए 16 जनवरी 2026 को पारित आदेश को वापस ले लिया और रोशनी केरकेट्टा सहित सभी संबंधित याचिकाओं को मूल क्रमांक पर बहाल कर मेरिट के आधार पर सुनवाई के लिए संबंधित बेंच के समक्ष भेजने का निर्देश दिया है। वर्ष 2018 में छत्तीसगढ़ पुलिस में सूबेदार, उप निरीक्षक और प्लाटून कमांडर सहित विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी।

हाईकोर्ट से याचिकाएं खारिज होने के बाद पुनर्विचार याचिका के जरिए न्याय की गुहार
लिखित परीक्षा में सफल होने के बाद कई महिला अभ्यर्थी शारीरिक दक्षता परीक्षा पीपीटी से पहले गर्भवती हो गई। उनका कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में असामान्य देरी के कारण वे गर्भवती हुईं, इसलिए उन्हें छह माह बाद शारीरिक दक्षता परीक्षा देने का अवसर दिया जाए। हाईकोर्ट ने 16 जनवरी 2026 को यह कहते हुए उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थी कि यह मुद्दा पहले ही एक अन्य मामले में तय हो चुका है। इसके बाद रोशनी केरकेट्टा ने रिव्यू पिटिशन दायर की थी।
रिव्यू पिटीशन पर कोर्ट ने की टिप्पणी
याचिका की सुनवाई जस्टिस एके प्रसाद के सिंगल बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि जिस पुराने फैसले को आधार बनाकर याचिका खारिज की गई थी, उसमें गर्भावस्था के कारण फिजिकल टेस्ट स्थगित करने के प्रश्न पर कोई स्पष्ट निर्णय ही नहीं दिया गया था। केवल किसी पक्ष की दलील का उल्लेख कर देना, उस मुद्दे पर फैसला माना नहीं जा सकता। कोर्ट ने कहा कि कोई निर्णय केवल उसी बात का नजीर होता है, जिस पर वास्तव में फैसला दिया गया हो। जिस मुद्दे पर विचार ही नहीं हुआ, उसे पहले से तय विवाद नहीं माना जा सकता।

