
14 जुलाई 2026 //
रायपुर न्यूज़ धमाका – राजधानी रायपुर से लगते डुमरतालाब गांव में रेलवे की जमीन की हेराफेरी की शिकायत कलेक्टर से की गई है। दस्तावेजों में हेरफेर का आरोप शिकायती ने लगाया है।
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से लगते ग्राम डुमरतालाब में रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत हुई है। शिकायत के मुताबिक, खसरा क्रमांक 43/2, अभिलेख के अनुसार रेलवे की सड़क भूमि है। लेकिन उसका अवैध बंटांकन, नामांतरण, बिक्री और कब्जा कर लिया गया है। शिकायतकर्ता ने उक्त रेलवे के मार्ग वाली भूमि के दुरुपयोग की जांच और वैधानिक कार्यवाही की मांग कलेक्टर रायपुर से की है।
दस्तावेजों में रेलवे की भूमि है दर्ज
शिकायतकर्ता बलबीर सिंह ने अपने पत्र में कलेक्टर रायपुर से कहा है कि, ग्राम डुमरतालाब स्थित भूमि संबंधी अभिलेखों में गंभीर अनियमितता, शासकीय/रेलवे सड़क भूमि के अवैध रूपांतरण, बंटांकन, नामांतरण एवं विक्रय का अत्यंत गंभीर प्रकरण प्रकाश में आया है। जिसकी निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच अत्यंत आवश्यक है।
लिखा है कि, खसरा क्रमांक 43/2 भूमि, वर्ष 1955 के पश्चात से अभिलेखों में और वर्ष 1977 से स्पष्ट रूप से रेलवे सड़क के रूप में दर्ज रही है। जो कि खसरा क्रमांक 30/4 में शामिल रही है। वर्तमान समय में भी उक्त भूमि बी-1 की कैफियत में खसरा क्रमांक 30/4 में शामिल रेलवे सड़क भूमि के रूप में अंकित है।
2000-2001 में हुआ पुनः बटांकन
किन्तु आश्चर्यजनक एवं गंभीर तथ्य यह है कि, वर्ष 2000-2001 में खसरा क्रमांक 43/1 से पुनः बंटांकन कर विवादित भूमि को 43/2 के रूप में पृथक दर्शाया गया तथा उसके आधार पर रजिस्ट्री एवं नामांतरण भी कर दिया गया। जबकि यदि उक्त भूमि वास्तविक रूप से रेलवे सड़क मार्ग भूमि थी तथा पूर्व अभिलेखों में खसरा क्रमांक 30/4 में सम्मिलित थी, तब ऐसी भूमि का पृथक बंटांकन, निजी स्वामित्व में परिवर्तन एवं नामांतरण किस वैधानिक अधिकार, आदेश संथवा अनुमति के आधार पर किया गया, यह अत्यंत गंभीर जांच का विषय है।

इन पर है आरोप
यह भी शिकायत है कि, उक्त रेलवे सड़क भूमि पर अवैध कब्जा एवं उत्खनन/खुदाई करने तथा कथित रूप से बिक्री करने का काम वंदना एसोसिएट्स द्वारा किया जा रहा है। संबंधित व्यक्तियों में श्रीमती रामकुमारभाई खेतूमल, गणेशभाई, समीरमल, रामलाल कस्तुचंद एवं महावीर आदि के नाम संज्ञान में आए हैं, जिनके द्वारा कथित रूप से सड़क रेलवे मार्ग की भूमि का विक्रय किया जाना गंभीर अवैधता एवं सार्वजनिक संपत्ति से छेड़छाड़ की श्रेणी में आता है।
इन बिंदुओं पर है जांच की मांग
- 1. खसरा क्रमांक 43/2 एवं 30/4 के वर्ष 1955 से वर्तमान तक के समस्त राजस्व अभिलेख, नक्शा, बी-1, खसरा पंचशाला, बंटांकन रिकॉर्ड एवं नामांतरण रिकॉर्ड की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए।
- 2. यह जांच कराई जाए कि वर्ष 2000-2001 में किस अधिकारी/तहसीलदार द्वारा, किस वैधानिक अनुमति एवं किस आधार पर रेलवे सड़क भूमि का पुनः बंटांकन कर खसरा क्रमांक 43/2 निर्मित किया गया।
- 3. यह भी जांच की जाए कि रेलवे सड़क / मार्ग भूमि का नामांतरण एवं रजिस्ट्री किस आदेश, अधिकार या तथ्य के आधार पर प्रमाणित की गई, तथा यदि इसमें अनियमितता पाई जाए तो संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर वैधानिक कार्यवाही की जाए।
- 4. वंदना एसोसिएट्स एवं संबंधित व्यक्तियों द्वारा कथित कब्जा, खुदाई एवं विक्रय की जांच कर तत्काल प्रभाव से अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए तथा यथास्थिति कायम की जाए।
- 5. यदि जांच में भूमि रेलवे सड़क पाई जाती है, तो संपूर्ण अवैध नामांतरण, बंटांकन एवं विक्रय संबंधी प्रविष्टियों को निरस्त कर भूमि को मूल स्वरूप में शासकीय अभिलेख में सुरक्षित किया जाए।


