
भोपाल न्यूज़ धमाका // इंडियन इकॉनामिक एसोसिएशन के 104वें वार्षिक सम्मेलन में पहुंचे सीएम शिवराज सिंह चौहान पहुंचे ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया। सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम ने आजादी के बाद देश की सत्ता संभालने वालों को कठघरे में किया। सीएम ने कहा कि आजादी के बाद दूसरे देशों के मॉडल को अपनाना देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी थी। सीएम ने कहा कि आज़ादी के बाद देश की सबसे बड़ी त्रासदी यह थी हमारे देश में जो मॉडल अपनाना था नहीं अपनाया। इसके कारण दूसरे देशों पर निर्भर होते गए। हमने आज़ादी के बाद दूसरे देशों के रास्ते पर चलने कोशिश की लेकिन, जब वो खुद देश सुखी नहीं रहे तो हम कैसे रहते। बता दें कि अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान की ओर से आयोजित सम्मेलन प्रशासन एकेडमी में 25 से 27 दिसम्बर तक रहेगा।

सीएम ने कहा कि ‘सियाराम मय सब जग जानी करहुं प्रनाम जोरि जुग पानी’ सबके कल्याण के लिए हमें सोचना होगा, इसके लिए व्यवस्थाएं बनाना होगा। एक ही चेतना समस्त जड़ चेतन में है। हम विकास के ऐसे मार्ग को चुने जो असमानता की खाई को बढ़ाने के बजाय इसे मिटाए। एक तरफ गगनचुंबी इमारतें हैं, तो दूसरी तरफ गरीब भाई-बहनों की झुग्गियां। आर्थिक रूप से ऐसी असमानता कैसे दूर हो, इस पर विचार करना होगा।
सीएम ने कहा कि धर्म का उद्देश्य यही है कि हम नियम और मर्यादा का पालन करते हुए अर्थ की प्राप्ति करें। अपने विकास के साथ राष्ट्र और समाज का भी चिंतन रखें। मनुष्य का वास्तविक विकास और सुख का आधार भारतीय संस्कृति के धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के सिद्धांत में स्थापित है। जब हम मनुष्य के विकास का चिंतन करें तो मन के सुख, बुद्धि के सुख, आत्मा के सुख का भी विचार करना चाहिए तभी हम विकास की सही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं और मनुष्य का समुचित विकास माना जाएगा।
मनुष्य को केवल शारीरिक सुख नहीं- मन, बुद्धि और आत्मा का भी सुख चाहिये। भौतिक सुखों के साथ दूसरों के जीवन में सुख के लिए जो कार्य किये जाते हैं, उससे अंतर्मन आनंदित होता है। हम भौतिक सुख सुविधा और शरीर के सुख के साथ संपूर्ण प्रकृति के संरक्षण का विचार रखें। प्रकृति का दोहन किया जाए ना कि शोषण। मनुष्य के जीवन में दो इच्छाएं कभी समाप्त नहीं होतीं, पहला कभी न मरना और हमेशा सुखी जीवन। लेकिन यह सत्य है कि मृत्यु होती ही है और जीवन में हमेशा सुखी नहीं रह सकता। फिर भी यही इच्छाएं हमेशा बनी रहती है।
