
दुर्ग न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों की हड़ताल से राजस्व कार्यालयों का कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है। 28 जुलाई से शुरू हुई इस हड़ताल से राजस्व सेवाएं ठप हैं, जिससे सबसे अधिक असर किसानों और ग्रामीणों पर पड़ा है।
क्या हैं मांगें?
17 सूत्रीय मांगों को लेकर यह हड़ताल की जा रही है। प्रमुख मांगों में शामिल हैं:
- पदोन्नति की समयसीमा सुनिश्चित करना
- राजपत्रित दर्जा देना
- शासकीय वाहन और सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करना
- कार्यभार के अनुसार उचित स्टाफ उपलब्ध कराना
कामकाज ठप, किसान बेहाल
तीन दिनों से तहसीलों में कोई नामांतरण, बंटवारा, ऋण पुस्तिका जारी, प्रमाण पत्र निर्माण जैसे जरूरी कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
किसानों को फसल ऋण, राजस्व दस्तावेज और अन्य सेवाओं के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, लेकिन अधिकारी अनुपस्थित हैं।
संघ की चेतावनी
छत्तीसगढ़ तहसीलदार संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 30 जुलाई तक मांगे नहीं मानी गईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। इससे प्रशासनिक तंत्र और ज्यादा अस्त-व्यस्त हो सकता है।
“हमने सरकार को ज्ञापन सौंप दिया है। अगर मांगे नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन और तेज होगा।”
– तहसीलदार संघ के प्रतिनिधि
प्रशासनिक व्यवस्था पर असर
- भूमि अभिलेखों का काम ठप
- ऋण पुस्तिका नहीं बन रही
- सत्यापन कार्य रुके
- बड़े पैमाने पर फाइलें लंबित
यह हड़ताल ऐसे समय पर हो रही है जब किसान खरीफ फसलों के लिए ऋण और भूमि दस्तावेजों की प्रक्रिया में लगे हुए हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ सकता है।



