
बिलासपुर न्यूज धमाका – बिलासपुर–रतनपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर महंगी गाड़ियों का काफिला खड़ा कर रील बनाने वाले रसूखदार युवाओं के खिलाफ केवल न्यूनतम चालानी कार्रवाई करने पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने मामले को स्वतः संज्ञान में लेते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
“केवल चालान क्यों? गाड़ियाँ ज़ब्त क्यों नहीं की गई?” — हाईकोर्ट
अदालत ने सुनवाई के दौरान तीखा सवाल किया,
“जब अन्य मामलों में गाड़ियां ज़ब्त कर थाने में खड़ी करवा ली जाती हैं, तो इस मामले में सिर्फ दो-दो हजार रुपये का चालान कर खानापूर्ति क्यों की गई?”
कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या मोटर व्हीकल एक्ट के अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अन्य धाराओं में कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या है मामला?
बिलासपुर में कुछ युवाओं ने हाल ही में रायपुर स्थित टोयोटा शोरूम से फॉर्च्यूनर खरीदने के बाद नेशनल हाईवे 130 (बिलासपुर–रतनपुर मार्ग) पर गाड़ियों की कतार खड़ी कर ट्रैफिक रोक दिया, और प्रोफेशनल फोटोग्राफर व ड्रोन कैमरे के साथ रील बनाई।
इसके बाद रील को सोशल मीडिया में पोस्ट किया गया, जिससे ट्रोलिंग शुरू हो गई। ID बंद कर दी गई, लेकिन वीडियो दो दिन तक वायरल रहा। इसके बाद भी पुलिस ने कोई कठोर कार्रवाई नहीं की, सिर्फ 7 गाड़ियों पर दो-दो हजार का चालान किया गया, और एक गाड़ी बाद में जोड़ी गई।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल
- न तो गाड़ियों को जब्त किया गया,
- न ही युवाओं के नाम या फोटो सार्वजनिक किए गए,
- न ही धारा 283 BNS (सार्वजनिक मार्ग बाधित करना) या अन्य आपराधिक धाराओं में FIR दर्ज हुई।
पुलिस की इस ‘मुलायम’ कार्रवाई पर सोशल मीडिया में बिलासपुर पुलिस की आलोचना शुरू हो गई।
कोर्ट की तीखी टिप्पणी
चीफ जस्टिस ने टिप्पणी की:
“क्या रसूखदार लोगों के लिए अलग कानून है? क्या यही समान कानून व्यवस्था है जिसकी संविधान में बात की गई है?”
सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है कि:
- अब तक क्या कार्रवाई की गई?
- क्यों न गाड़ियों को जब्त कर थाने में खड़ा किया गया हो?
- मोटर व्हीकल एक्ट के अलावा अन्य धाराएं क्यों नहीं जोड़ी गईं?
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई में सरकारी पक्ष से जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
क्या कहती है जनता?
इस मामले को लेकर आम लोगों में गहरा रोष है। सोशल मीडिया पर उठी मांग है कि:
- रसूखदार हो या आम नागरिक — कानून सबके लिए एक होना चाहिए।
- पुलिस की कार्यप्रणाली की न्यायिक जांच होनी चाहिए।



