रायपुर,न्यूज़ धमाका :- आखिरकार वह वक्त आ गया, जिसे लेकर अभिभावकों और नौनिहालों को दो साल से इंतजार था। पीठ पर बस्ता, हाथ में पानी बाटल लेकर नौनिहाल सोमवार को स्कूल पहुंचे तो परिसर गुलजार हो उठा। कुछ बच्चे ऐसे भी थे, जो कि पहली बार स्कूल पहुंचे थे, उनमें स्कूल को जानने का कौतूहल था। स्कूल जाने की उत्सुकता और खुशी उनके चेहरे पर देखते ही बनती रही।
स्कूल पहुंचकर बच्चों ने पहले ही दिन खूब मस्ती की। कोरोना के कारण दो साल से नर्सरी और पहली से पांचवीं तक के बच्चों के स्कूल नहीं खुले थे। ऐसे में यह दिन बच्चों और अभिभावकों के लिए आशा की एक नई किरण लेकर आया। इस दिन अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस होने के कारण बच्चों के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिक भी स्कूल पहुंचे और बच्चों को कहानियां सुनाकर मनोरंजन किया।कहानी सुनाने में शिक्षकों ने भी अपनी भूमिका निभाई। स्कूल शिक्षा विभाग ने इसके लिए आदेश भी जारी किया था। रायपुर के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एएन बंजारा ने इधर स्कूल शिक्षा का ‘अपन भाखा म” वेबिनार
अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के अवसर पर ‘अपन भाखा म” छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रों में बोली जाने वाली बोली-भाषा पर वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम वरिष्ठ कवि, लेखक, साहित्यकार डा. पीसी लाल यादव के मुख्य अतिथ्य में आयोजित किया गया।कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि व लेखक मीर अली मीर, प्रसिद्ध गीतकार, कवि, लेखक, साहित्यकार डा. चम्पेश्वर गोस्वामी अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा द्वारा किया गया। वेबिनार में सभी अतिथियों ने मातृभाषा के महत्व को अपनी-अपनी रचनाओं के माध्यम से विस्तृत रूप से बताया। कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों के शिक्षकों ने हिस्सा लिया। शिक्षकों ने अपने-अपने क्षेत्रों में बोली जाने वाली स्थानीय बोली-भाषा और छत्तीसगढ़ी भाषा के माध्यम से अपने विचारों को स्वरचित रचनाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया।

