
दुर्ग न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से एक मर्मस्पर्शी और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जामगांव आर थाना क्षेत्र में तीन वर्षीय मासूम सिद्धार्थ की मटर फेफड़ों में फंस जाने से मौत हो गई। यह हादसा तब हुआ जब बच्चा मोबाइल पर वीडियो देखते हुए मटर खा रहा था।
मोबाइल छीने जाने पर घबराहट में निगली मटर
जानकारी के अनुसार, सिद्धार्थ मोबाइल फोन पर वीडियो देख रहा था और साथ ही मटर भी खा रहा था। इसी दौरान जब उसके चाचा ने मोबाइल छीना, तो वह अचानक घबरा गया और मटर का दाना निगल बैठा, जो सीधे उसके श्वसन तंत्र (फेफड़े) में जाकर फंस गया।
परिजन तुरंत उसे अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं और डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह घटना पूरे क्षेत्र में शोक और चिंता का कारण बन गई है।
जांजगीर-चांपा: तालाब में डूबकर चार बच्चों की मौत
इसी बीच, जांजगीर-चांपा जिले के भैंसतरा गांव (बलौदा थाना क्षेत्र) में तालाब में डूबने से चार बच्चों की मौत हो गई है। मृतकों में तीन लड़कियां और एक लड़का शामिल हैं, जिनकी उम्र 5 से 8 वर्ष के बीच बताई जा रही है।
कपड़े किनारे दिखे तो हुआ शक
बच्चे दोपहर बाद करीब 3 बजे तालाब में नहाने गए थे। जब देर तक वापस नहीं लौटे और तालाब किनारे उनके कपड़े मिले, तो ग्रामीणों को शक हुआ। पुलिस को सूचना दी गई, और खोजबीन के दौरान चारों बच्चों के शव बरामद किए गए।
बचपन की सुरक्षा पर उठते सवाल
दोनों घटनाएं बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती हैं।
- दुर्ग की घटना बताती है कि छोटे बच्चों को मोबाइल और खाने का संयोजन देना जानलेवा हो सकता है।
- जांजगीर-चांपा की घटना यह दर्शाती है कि तालाब, नदी या अन्य जलस्रोतों के पास बच्चों को बिना निगरानी के छोड़ना खतरे से खाली नहीं है।
विशेषज्ञों की राय
बाल रोग विशेषज्ञों और सुरक्षा सलाहकारों का मानना है कि:
- 5 साल से कम उम्र के बच्चों को छोटे कणों वाला खाना (जैसे मटर, मूंगफली) निगरानी में ही दिया जाए।
- मोबाइल का प्रयोग केवल अभिभावकों की देखरेख में और सीमित समय तक ही हो।
- ग्रामीण क्षेत्रों में तैराकी जागरूकता, तालाबों की घेराबंदी, और समुदाय निगरानी तंत्र आवश्यक है।
