
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में नए मुख्य सचिव (Chief Secretary) की नियुक्ति के साथ ही मंत्रालय में बड़ी प्रशासनिक सर्जरी की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं। वर्तमान मुख्य सचिव अमिताभ जैन 30 जून को सेवानिवृत्त हो रहे हैं, और उनके स्थान पर नए मुख्य सचिव की घोषणा या तो उसी दिन या उससे एक-दो दिन पहले हो सकती है। इस बदलाव के साथ मंत्रालय में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) स्तर के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को मंत्रालय से बाहर किया जा सकता है।
क्या होगा मंत्रालय में बदलाव का आधार?
अगर नए मुख्य सचिव के रूप में सीनियर अफसर को नहीं, बल्कि किसी जूनियर अफसर को नियुक्त किया जाता है, तो उससे ऊपर के अधिकारियों को परंपरागत रूप से मंत्रालय से बाहर किसी अन्य महत्वपूर्ण पद पर भेजा जाता है। उदाहरण के लिए:
- प्रशासन अकादमी,
- रेवेन्यू बोर्ड,
- माध्यमिक शिक्षा मंडल जैसे संस्थानों में उन्हें पदस्थ किया जा सकता है।
यह परंपरा पहले भी कई बार अपनाई गई है — जैसे 2007 और 2011 में जब वरिष्ठ अफसरों को सुपरसीड किया गया था।
संभावित नाम और सीनियरिटी समीकरण
मुख्य सचिव पद के दावेदार इस प्रकार हैं:
- रेणु पिल्ले – सबसे सीनियर, पर सरकार से मतभेद की चर्चाएं।
- सुब्रत साहू
- अमित अग्रवाल – वर्तमान में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर।
- ऋचा शर्मा
- मनोज पिंगुआ
यदि रेणु पिल्ले को सीएस बनाया गया तो मंत्रालय में कोई बड़ा फेरबदल नहीं होगा। लेकिन यदि सुब्रत साहू, ऋचा शर्मा या मनोज पिंगुआ को सीएस बनाया गया तो रेणु पिल्ले को मंत्रालय से बाहर शिफ्ट करना पड़ सकता है। वहीं, अगर अमित अग्रवाल लौटकर सीएस बनते हैं तो सुब्रत और रेणु दोनों को बाहर पोस्ट किया जा सकता है।
पूर्व के उदाहरण
- 2007: शिवराज सिंह की नियुक्ति के बाद बीकेएस रे, पी. राघवन और बीके कपूर को मंत्रालय से बाहर किया गया।
- 2011: सुनिल कुमार को सीएस बनाने के बाद नारायण सिंह को हटाकर माध्यमिक शिक्षा मंडल भेजा गया।
- 2019: आरपी मंडल के मुख्य सचिव बनने पर उनके बैचमेट सीके खेतान को रेवेन्यू बोर्ड चेयरमैन बनाया गया।
क्या सचिव स्तर पर भी बदलाव होंगे?
यदि अमित अग्रवाल सीएस बनते हैं, तो कुछ सचिव स्तर के बदलाव हो सकते हैं। अन्यथा फिलहाल कोई व्यापक परिवर्तन की संभावना नहीं दिखती। हाल ही में सरकार ने मंत्रालय में कुछ बदलाव पहले ही किए हैं।
निष्कर्ष
नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के साथ ही छत्तीसगढ़ मंत्रालय में उच्च स्तर पर बदलाव लगभग तय माना जा रहा है। सभी की नजरें अब 30 जून या उससे पहले सरकार की घोषणा पर टिकी हैं। क्या सीनियर अफसर को मौका मिलेगा या कोई युवा, गतिशील आईएएस को? यह फैसला न केवल प्रशासनिक संतुलन तय करेगा बल्कि राजनीतिक संकेत भी देगा।


