गरियाबंदछत्तीसगढ

किसानों की मेहनत पर फिरा पानी : बेमौसम बारिश से 20 किसान परिवार की 70 फीसदी फसल खराब, रोते बिलखते बताई आपबीती, तहसीलदार ने कहा नहीं मिलेगा मुआवजा

गरियाबंद न्यूज़ धमाका //  बेमौसम बारिश ने नदी की उथली रेत पर सब्जी की खेती करने वाले 20 परिवार की मेहनत पर पानी फिर गया है. बारिश की वजह से सब्जी पूरी तरह पानी में डूबने से खराब हो गई है. बेमौसम बारिश के कारण हुए नुकसान से किसान कर्ज के बोझ तले दब चुके हैं.

बीते 10 जनवरी से 15 जनवरी तक हुई बारिश ने देवभोग के 20 भूमिहीन किसान परिवार की मेहनत पर पानी फेर दिया है, जिनकी रोजी-रोटी नदी की रेत पर निर्भर है. तेल नदी के दबनई, दहिगांव, करचिया, निष्टिगुड़ा, परेवापाली और सेनमूड़ा घाट पर 20 किसान परिवार लगभग 30 एकड़ रेत पर हर साल सब्जी की खेती करते आ रहे हैं.

बता दें कि आर्गेनिक तरीके से हो रही इसी खेती के बदौलत इलाके भर में गर्मी के दिनों में ताजी और हरी सब्जियां उपलब्ध होती हैं, लेकिन इस बार हुई बेमौसम बारिश ने 70 फीसदी सब्जी की फसल चौपट कर दी है.

देवभोग के किसान पदूनाथ और भकचंद निषाद ने बताया कि अचानक नदी में आए बहाव से टमाटर, बरबट्टी, टिंडा, नारंगी, करेला, भांठा, तरबूज के अलावा कुल 12 प्रकार के सब्जियों के पौधे नष्ट हो गए. पौधे पानी में 4 से 5 दिन डूबे रहे, जिससे फसल का नुकसान हो गया. उन्होंने यह भी बताया कि वे लोग पिछले 20 से 25 वर्षो से खेती करते आ रहे हैं, ऊपर वाले ने साथ दिया तो प्रति एकड़ 50 से 60 हजार की आमदनी हो जाती है. इस आमदनी के लिए इतना ही लागत और 4 माह की मेहनत लगानी पड़ती है.

किसान परिवार अपनी आपबीती बताते हुए कई बार रो पड़े. रोते हुए किसानों ने कहा कि इस नुकसान की भरपाई कोई नहीं करता है. किसानों ने कहा कि इससे पहले भी नुकसान हुआ पर अधिकतम 30 फीसदी ही भुगतान हुआ, जिसकी भरपाई वो दुगुनी मेहनत कर भरपाई कर लेते थे.

इस बार हुई बेमौसम ने उन्हें बुरी तरह डूबा दिया है. इन भूमिहीन किसानों को सरकारी कर्ज नहीं मिलता है, किसान साहूकारी से कर्ज लेकर 6 माह गुजारे का इंतजाम करने के लिए परिवार सहित दिन रात मेहनत करते हैं. 20 परिवार के 88 सदस्य का नदी के रेत से गुजारा चलता है.

टैक्स नहीं भरते, इसलिए मुआवजा संभव नहीं

नायब तहसीलदार अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि ऐसी जमीन या रेत पर खेती सिवाय चक आय की श्रेणी में आता है. रकबा के आधार पर सलाना मामूली शुल्क पटाकर पंजीयन कराना होता है. विगत 2 वर्षों से इन्हें टैक्स भरकर पंजीयन कराने कहा जा रहा है, लेकिन सीजन में किसान भूल जाते हैं, इसलिए इन्हें मुआवजा नहीं मिल सकता. नदी में डूब चुके कुछ ऐसे भी रकबा हैं, जिनके भूमि स्वामी हैं, उन्हें मुआवजा देना संभव है.

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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