
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में सरकारी दफ्तरों में फाइव डे वीक यानी सप्ताह में शनिवार और रविवार अवकाश की व्यवस्था पर अब पुनर्विचार शुरू हो गया है। कारण है — लगातार छुट्टियों की भरमार, जिससे कामकाज ठप, योजनाएं अटक रहीं और जनता परेशान हो रही है।
क्या है परेशानी की जड़?
- 11 दिन में 7 दिन छुट्टी: अप्रैल-मई में लगातार त्योहार और वीकेंड की छुट्टियों के चलते सिर्फ चार दिन ऑफिस खुले।
- तीन दिन लगातार अवकाश: शुक्रवार को छुट्टी हो तो तीन दिन तक ताले लग जाते हैं।
- समय पर नहीं पहुंचते कर्मचारी: अधिकांश कार्यालयों में सुबह 10 के बजाय 11 बजे हाजिरी और साढ़े 5 बजे से पहले पलायन।
- बायोमेट्रिक उपस्थिति लागू नहीं: न अफसर तैयार, न बाबू, न शिक्षक।
सरकार का मंथन: हो सकता है फाइव डे वीक खत्म
- दिसंबर 2023 में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही इस पर चर्चा थी।
- अब यह प्रस्ताव है कि केवल दूसरा और चौथा शनिवार अवकाश रहे — जैसे पहले था।
- यह मॉडल केंद्र सरकार की तर्ज पर हो सकता है, जिसमें नौ से पांच तक सख्त ड्यूटी और बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य होती है।
छुट्टियों का सियासी फायदा भी नहीं मिला
- पिछली सरकार ने कर्मचारियों को छुट्टियों का बोनस दिया, मगर इसका राजनीतिक फायदा नहीं हुआ।
- कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई, और भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की।
- यानी छुट्टियाँ वोट में नहीं बदलीं।
प्रभाव:
- आम जनता को दफ्तरों के चक्कर लगाना पड़ता है, काम नहीं होता।
- योजनाएं अटक जाती हैं, प्रोजेक्ट्स में देरी होती है।
- वर्क कल्चर पर सवाल उठ रहे हैं — “काम कम, छुट्टी ज़्यादा!”
विशेषज्ञों की राय:
“छत्तीसगढ़ में जब तक कार्य संस्कृति को सख्ती से लागू नहीं किया जाएगा, केवल अवकाश बढ़ाना सिस्टम के लिए आत्मघाती है।”
— प्रशासनिक विश्लेषक



