
दुर्ग जिले में सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से स्कूली शिक्षा को मजबूत किया जाएगा। शासकीय स्कूलों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने, पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने तथा नवाचार के लिए व्यक्तिगत स्तर पर अथवा स्वयंसेवी संगठन आगे आकर कार्य कर सकते हैं। यह विद्यांजलि 2.0 कार्यक्रम से संभव हो सकेगा। बुधवार को कलेक्टर डा. सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने यह बात विद्यांजलि 2.0 कार्यक्रम की समीक्षा बैठक में कही।
बैठक में कलेक्टर ने बताया कि यह कार्यक्रम सामुदायिक संस्थाओं और शिक्षा के क्षेत्र में रुचि लेने वाले लोगों की भागीदारी से चलाया जाना है। कलेक्टर ने इस मौके पर कहा कि आने वाली पीढ़ी को मजबूत करने शिक्षा की ठोस नींव रखनी जरूरी है। यह बेहद महत्वपूर्ण कार्यक्रम है और सामुदायिक भागीदारी इसे अत्याधिक सशक्त करेगी।
संस्थाएं स्कूलों में अधोसंरचना बढ़ाने कई तरह से मदद कर सकती हैं। उदाहरण के लिए कोई संस्था चाहे कि अच्छी किताबें स्कूल की लाइब्रेरी में हो तो ऐसी किताबें स्कूलों को उपलब्ध कराई जा सकती हैं।
यदि किसी स्कूल में फर्नीचर की उपलब्धता की जरूरत है तो संस्था फर्नीचर उपलब्ध करा सकती हैं। व्यक्तिगत स्तर पर भी इसमें काफी ठोस कार्य किया जा सकता है। जो लोग शैक्षणिक अभिरुचि रखते हैं और बच्चों को इसके लिए तैयार करने की क्षमता रखते हैं वे इसमें सहयोग दे सकते हैं। ऐसा करके वे विशेष रूप से पढ़ाई में कमजोर बच्चों की मदद कर सकते हैं।



