
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण युक्तियुक्तकरण अभियान चलाया है। इसके तहत अब राज्य में कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं रहा, और एकल शिक्षक स्कूलों की संख्या में 80% तक की कमी आई है।
मुख्य बिंदु
- 10,372 स्कूलों का एकीकृत परिसर के रूप में समायोजन किया गया।
- पहले राज्य में 6,872 प्राथमिक और 255 पूर्व माध्यमिक शालाएं केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रही थीं।
- अब एकल शिक्षकीय शालाएं घटकर 1,200 रह गई हैं।
- शिक्षक विहीन 260 शालाएं (212 प्राथमिक + 48 पूर्व माध्यमिक) अब पूरी तरह शिक्षकों से युक्त हैं।
- 166 स्कूलों (ग्रामीण: 133, शहरी: 33) का विलय उनकी निकटता और कम दर्ज संख्या के आधार पर किया गया।
शिक्षक पुनः विनियोजन (युक्तियुक्तकरण) का आँकड़ा
- जिला स्तर: 13,793 शिक्षक
- संभाग स्तर: 863 शिक्षक
- राज्य स्तर: 105 शिक्षक
छात्रों को होगा बड़ा लाभ
- छात्रों को बार-बार स्थानांतरण प्रमाणपत्र लेने की जरूरत नहीं।
- छोटे बच्चों को बड़े छात्रों का मार्गदर्शन, विज्ञान, खेल और सांस्कृतिक गतिविधियों की बेहतर सुविधा।
- समय सारिणी और शैक्षणिक गतिविधियों में एकरूपता, शिक्षक अनुपात में संतुलन।
- शाला त्यागी छात्रों की संख्या में कमी और पुनः प्रवेश में सहूलियत।
राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन
- छत्तीसगढ़ का पीटीआर (छात्र-शिक्षक अनुपात):
- प्राथमिक स्तर: 20 (राष्ट्रीय औसत: 29)
- पूर्व माध्यमिक स्तर: 18 (राष्ट्रीय औसत: 38)
सरकार का स्पष्ट संदेश
राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
“कोई भी स्कूल बंद नहीं किया जा रहा, न ही किसी शिक्षक का पद समाप्त हो रहा है। युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य बेहतर अधोसंरचना और संसाधनों के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।”
एक समावेशी और प्रभावी शिक्षा प्रणाली की ओर
यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अनुरूप उठाया गया है, जो छत्तीसगढ़ को एक न्यायसंगत, कुशल और भविष्योन्मुखी शिक्षा व्यवस्था की दिशा में अग्रसर करता है।



