
कोरबा न्यूज धमाका – श्रावण मास के तीसरे सोमवार को कोरबा जिले में भक्ति और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। हजारों शिवभक्तों ने हसदेव नदी से पवित्र जल उठाकर पदयात्रा करते हुए कनकी धाम स्थित शिव मंदिर तक कांवड़ यात्रा निकाली। इस दौरान नगर निगम महापौर संजू देवी, भाजपा पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि भी कावड़ियों के साथ सहभागी बने।
हसदेव नदी से जल उठाकर शुरू हुई यात्रा
सुबह शिवभक्तों ने मां सर्वमंगला मंदिर के प्रांगण में पूजा-अर्चना कर हसदेव नदी से स्नान और जल संग्रह किया। इसके बाद नहर किनारे से गुजरती हुई पदयात्रा कनकी धाम की ओर रवाना हुई। पूरे मार्ग पर “बोल बम” के जयकारे, भक्ति गीत और ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देती रही।
भाजपा प्रतिनिधियों की भागीदारी
- कांवड़ यात्रा का नेतृत्व भाजपा नेता नरेंद्र देवांगन ने किया, जो उद्योग मंत्री लखन देवांगन के भाई और कोहड़िया वार्ड से निर्विरोध पार्षद चुने गए हैं।
- नगर निगम महापौर संजू देवी राजपूत ने भी यात्रा में भाग लेकर शिवभक्तों का उत्साहवर्धन किया।
- इस अवसर पर भाजपा के कई अन्य पदाधिकारी, पार्षद और बड़ी संख्या में आमजन भी पदयात्रा में शामिल हुए।
राजिम में उमड़ा भक्तों का सैलाब, कुलेश्वर महादेव मंदिर में पूजा
छत्तीसगढ़ के धार्मिक केंद्र राजिम (प्रयागराज) में भी सावन के तीसरे सोमवार पर भक्ति का ज्वार उमड़ा। त्रिवेणी संगम के मध्य स्थित कुलेश्वर महादेव मंदिर में हज़ारों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचे।
- मान्यता है कि वनवास काल में माता सीता ने इस शिवलिंग की स्थापना की थी।
- इस दिन से पंचकोशी यात्रा का भी शुभारंभ होता है।
पूर्व विधायक धनेन्द्र साहू ने की पंचकोशी यात्रा की शुरुआत
- पूर्व विधायक धनेन्द्र साहू ने शिवलिंग पर जलाभिषेक कर पंचकोशी यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया।
- वे पिछले 10 वर्षों से इस यात्रा का नेतृत्व करते आ रहे हैं, और इस बार भी हजारों श्रद्धालु उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर निकले।
श्रद्धा, सुरक्षा और सहयोग
- यात्रा मार्ग पर प्रशासन और पुलिस की विशेष व्यवस्था, स्वास्थ्य विभाग की तैनाती और स्वयंसेवकों का सक्रिय योगदान देखने को मिला।
- कांवड़ यात्रियों के लिए जलपान केंद्र, मेडिकल सुविधा, पुलिस सहायता बूथ भी लगाए गए थे।
निष्कर्ष
श्रावण मास के इस तीसरे सोमवार को छत्तीसगढ़ के कोरबा और राजिम क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सामाजिक सहभागिता और सांस्कृतिक एकता का अनुपम उदाहरण देखने को मिला। यह आयोजन न केवल भक्ति का प्रतीक बना, बल्कि समुदायिक समरसता और सहयोग की भावना को भी बल मिला।


