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जामगांव में शव दफनाने को लेकर बवाल: चर्च में तोड़फोड़, धर्मांतरण बना विवाद की जड़

जामगांव में बेकाबू हुई भीड़ : शव दफनाने का विवाद बढ़ा, ग्रामीणों के आक्रोश के आगे प्रशासन बेबस

कांकेर न्यूज धमाका – कांकेर जिले के जामगांव में एक धर्मांतरित व्यक्ति के अंतिम संस्कार को लेकर उपजा विवाद सोमवार को उग्र हो गया। नाराज़ ग्रामीणों की भीड़ ने चर्च में घुसकर तोड़फोड़ कर दी, जिससे क्षेत्र में तनाव का माहौल बन गया है। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद भीड़ को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया।


क्या है पूरा मामला?

  • मृतक सोमलाल राठौर, जो पहले आदिवासी समुदाय से थे, बाद में ईसाई धर्म अपना चुके थे।
  • 27 जुलाई की सुबह उनका अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाज से जामगांव नाला के पास अपने खेत में किया गया।
  • सुबह 11 बजे के बाद ग्रामीणों को जब जानकारी मिली, तो भारी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हो गए और दफन के तरीके और स्थान पर आपत्ति जताई।

ग्रामीणों की आपत्ति क्या है?

ग्रामीणों का कहना है:

“मृतक पहले आदिवासी थे, इसलिए उनका अंतिम संस्कार गांव के पारंपरिक श्मशान घाट में होना चाहिए था। खेत में शव दफनाकर रीति-रिवाज का उल्लंघन हुआ है।”

भीड़ की माँग:

  • शव को उत्खनन कर निकालने और
  • गांव के श्मशान में दोबारा दफनाने की मांग

जब मांगें नहीं मानी गईं, तो गुस्साए ग्रामीणों ने स्थानीय चर्च में घुसकर तोड़फोड़ कर दी।


प्रशासन की भूमिका और चुनौती

  • नरहरपुर थाना प्रभारी सुरेश राठौर मौके पर दल-बल के साथ पहुंचे, लेकिन भीड़ ज्यादा होने की वजह से स्थिति नियंत्रित नहीं हो सकी।
  • दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की गई, लेकिन ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे।
  • जिला मुख्यालय से अतिरिक्त पुलिस बल भेजा गया है, पर अभी तक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

चर्च और भूमि विवाद की पृष्ठभूमि

  • यह विवाद अचानक नहीं हुआ है।
  • जामगांव में पिछले दो साल से धर्मांतरण और प्रार्थना स्थल की वैधता को लेकर विवाद जारी है।
  • ग्रामीणों का आरोप है कि चर्च गांव की जमीन पर अवैध कब्जा कर बनाया गया है।
  • तहसीलदार कार्यालय में इस संबंध में मामला लंबित है।

धर्मांतरण पर विवाद क्यों?

ग्रामीणों की बात:

“धर्मांतरण के बाद गाँव में सामाजिक शांति प्रभावित हुई है। सरकार को इस पर सख़्त नीति बनानी चाहिए।”

जबकि धर्मांतरित परिवार का पक्ष:

“हमने अपने खेत में शव दफनाया है, किसी और की जमीन नहीं ली। फिर विवाद क्यों?”


अब सवाल ये हैं:

  • क्या अंतिम संस्कार की स्वतंत्रता निजी अधिकार है या सामुदायिक परंपरा से बंधी हुई?
  • क्या धार्मिक आस्था के आधार पर कानून व्यवस्था को चुनौती देना उचित है?
  • और सबसे अहम – प्रशासन इस आग को समय रहते कैसे बुझाएगा?

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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