छतीसगढ़रायपुर

2.54 करोड़ के इनामी 66 हार्डकोर नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, CM साय बोले – बस्तर में विकास की नई सुबह

रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बस्तर रेंज में नक्सलवाद के खिलाफ सरकार को एक बड़ी सफलता मिली है। एक ही दिन में 66 हार्डकोर नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। इनमें कई कुख्यात व शीर्षस्थ माओवादी शामिल हैं, जिन पर कुल मिलाकर ₹2.54 करोड़ का इनाम घोषित था। इस आत्मसमर्पण को राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति की ऐतिहासिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

सबसे बड़ा आत्मसमर्पण: टॉप लीडर रामन्ना ईरपा भी शामिल

आत्मसमर्पण करने वालों में ₹25 लाख का इनामी साउथ जोनल कमेटी मेंबर (SZCM) रामन्ना ईरपा उर्फ जगदीश जैसे उच्च स्तरीय माओवादी नेता भी शामिल हैं। यह घटना माओवादी नेटवर्क की कमर तोड़ने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

जिलावार आत्मसमर्पण की स्थिति:

  • बीजापुर: 25 नक्सली
  • दंतेवाड़ा: 15 नक्सली
  • कांकेर: 13 नक्सली
  • नारायणपुर: 8 नक्सली
  • सुकमा: 5 नक्सली

CM साय का बयान – “बस्तर में नक्सलवाद की रात ढल रही है”

इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा:

“नक्सलवाद की रात अब ढल रही है, और बस्तर में विकास की नई सुबह हो रही है। पिछले 18 महीनों में कुल 1,570 माओवादी कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं। यह हमारी पुनर्वास नीति और समर्पित सुशासन का प्रत्यक्ष परिणाम है।”

उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में “डबल इंजन सरकार” की नीति का सकारात्मक प्रभाव बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सुरक्षा नहीं, बल्कि सड़क, बिजली, पानी, परिवहन और जनकल्याण के हर क्षेत्र में आम जनता तक सुविधाएं पहुंचाना है।

“पूना मारगेम” नीति की सफलता

सीएम साय ने छत्तीसगढ़ सरकार की आत्मसमर्पण नीति “पूना मारगेम : पुनर्वास से पुनर्जीवन” को इस बदलाव की कुंजी बताया। उन्होंने कहा:

“हम नक्सलियों को सिर्फ आत्मसमर्पण के लिए नहीं, बल्कि एक नया जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह नीति बस्तर के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।”


सुरक्षा और समावेश का संतुलन

विशेषज्ञों का मानना है कि आत्मसमर्पण की यह लहर केवल सुरक्षा बलों के ऑपरेशनों का परिणाम नहीं है, बल्कि यह विकास और विश्वास की नीति का प्रभाव है। सरकार की रणनीति अब बंदूक से नहीं, संवाद और समावेश से बस्तर को बदलने पर केंद्रित है।


समाप्ति टिप्पणी:

बस्तर में एक साथ इतने बड़े स्तर पर आत्मसमर्पण माओवादी हिंसा के अंत की आहट है। यह केवल नक्सलियों का हथियार डालना नहीं, बल्कि भटकी हुई सोच से मुक्ति और नई शुरुआत का संकल्प है। बस्तर, जो दशकों तक बंदूक की गूंज से दहला करता था, अब विकास, विश्वास और पुनर्निर्माण की राह पर है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!