
बालोद न्यूज धमाका – जिले के ओरमा गांव से धार्मिक आस्था को आहत करने वाली एक बेहद गंभीर और आपत्तिजनक घटना सामने आई है। अज्ञात असामाजिक तत्वों ने गांव के प्राचीन शिव मंदिर में तोड़फोड़ कर शिवलिंग और नंदी देव की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर दिया। यह घटना शुक्रवार रात की बताई जा रही है, जिसने शनिवार सुबह गांव को स्तब्ध कर दिया।
पूजा सामग्री भी तालाब में फेंकी
मंदिर परिसर में न सिर्फ मूर्तियों को तोड़ा गया, बल्कि वहां रखी पूजा सामग्री, जल पात्र, कलश और अन्य पवित्र वस्तुओं को भी उठाकर पास के तालाब में फेंक दिया गया। यह कृत्य स्थानीय लोगों के अनुसार सुनियोजित और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने के लिए किया गया।
सुबह होते ही गांव में उबाल
शनिवार सुबह जैसे ही ग्रामीण मंदिर पहुंचे और टूटी हुई प्रतिमाओं व बिखरी वस्तुओं को देखा, पूरे गांव में गुस्से और आक्रोश का माहौल बन गया। बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग मंदिर परिसर में एकत्र हो गए और इस धार्मिक अपमान के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करने लगे।
गांव के प्रतिनिधियों ने दी कड़ी प्रतिक्रिया
ग्राम समिति अध्यक्ष, सचिव और वरिष्ठ नागरिकों ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत किया, लेकिन उन्होंने साफ कहा कि:
“यह घटना केवल मूर्तियों की तोड़फोड़ नहीं है, बल्कि हमारी परंपरा, संस्कृति और आस्था पर सीधा हमला है। यह किसी भी हाल में सहन नहीं किया जाएगा। दोषियों को शीघ्र गिरफ्तार कर सख्त सजा दी जाए।”
एफआईआर की प्रक्रिया शुरू, पुलिस जांच में जुटी
ग्रामीणों ने बालोद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही है। खबर लिखे जाने तक पुलिस अधिकारियों की एक टीम मौके पर पहुंच चुकी थी, जिसने मंदिर परिसर की वीडियोग्राफी और साक्ष्य एकत्रित करने का काम शुरू कर दिया है। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय जानकारी के आधार पर जांच तेज कर दी है।
सामाजिक सौहार्द्र को चुनौती
यह घटना न केवल धार्मिक भावना पर प्रहार है, बल्कि गांव में सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने की साजिश भी प्रतीत होती है। स्थानीय प्रशासन से लेकर धार्मिक संगठनों तक, सभी इस घटना को लेकर चिंतित हैं।
ग्रामीणों की मांगें
- दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी और सार्वजनिक रूप से खुलासा
- मंदिर परिसर में स्थायी सुरक्षा व्यवस्था
- क्षतिग्रस्त मूर्तियों का पुनः प्राण-प्रतिष्ठा समारोह
- घटना की न्यायिक जांच की मांग
