
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में आयोजित सुशासन तिहार के तहत एक बेहद अनोखा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। ग्राम कोड़ापुरी के ग्रामीणों ने सरकारी शिविर में सरकारी शराब दुकान खोलने की मांग करते हुए विधायक को बाकायदा लिखित आवेदन सौंपा।
क्या है मामला?
तखतपुर विधानसभा क्षेत्र के जरौंधा गांव में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में विधायक धर्मजीत सिंह पहुंचे थे। इसी दौरान कोड़ापुरी गांव के ग्रामीणों ने कहा कि गांव में अवैध शराब और महुआ लहान से बन रही जहरीली शराब के कारण लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे अत्यधिक परेशान हैं, क्योंकि यह शराब न सिर्फ स्वास्थ्य बिगाड़ रही है, बल्कि सामाजिक और पारिवारिक तनाव भी बढ़ा रही है।
ग्रामीणों का तर्क:
अगर सरकारी शराब दुकान खोल दी जाए, तो अवैध शराब बिक्री पर अंकुश लगेगा और शुद्ध शराब मिलने से स्वास्थ्य नुकसान कम होगा।
विधायक का जवाब
विधायक धर्मजीत सिंह ने ग्रामीणों की मांग पर हैरानी जताते हुए कहा:
“22 साल की राजनीति में आज पहली बार किसी गांव ने शराब दुकान खुलवाने की मांग की है। अगर ग्रामीण कह रहे हैं, तो खुलवा देंगे। यह भी सुशासन का हिस्सा है।”
उन्होंने मौके पर मौजूद आबकारी अधिकारी कल्पना राठौर को निर्देशित किया कि गांव में अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर तत्काल कार्रवाई की जाए और शासकीय दुकान खोलने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
सामाजिक बहस को जन्म देने वाला मामला
यह घटना नीतिगत और सामाजिक दृष्टिकोण से गहरा प्रश्न उठाती है —
क्या सरकारी शराब दुकानें खोलकर अवैध शराब को रोका जा सकता है?
या यह ‘बुराई के मुकाबले नियंत्रित बुराई’ का विकल्प है?
पृष्ठभूमि: सुशासन तिहार क्या है?
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 5 से 31 मई तक चलाया जा रहा सुशासन तिहार अभियान, एक जनसुनवाई और समाधान अभियान है, जिसमें अधिकारी गांव-गांव जाकर जनता की शिकायतें सुनते हैं और समाधान करते हैं। मुख्यमंत्री खुद कई जगह सीधे शिविरों में मौजूद रहते हैं।

सोशल मीडिया में वायरल वीडियो
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें विधायक ग्रामीणों से संवाद करते और “खुलवा देंगे” कहते सुने जा सकते हैं। यह वीडियो सरकारी शराब नीति पर बहस और ग्रामीण क्षेत्रों में शराब से जुड़ी सामाजिक स्थितियों को लेकर नए सवाल खड़े कर रहा है।
