
भोपाल न्यूज़ धमाका /// शहर के जंबूरी मैदान में ‘जनजातीय गौरव दिवस समारोह’ का आयोजन किया गया है. पीएम नरेंद्र मोदी ने मंच में राम-राम और सेवा जोहार कर अपनी भाषण की शुरुआत की. प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरे देश के लिए आज बहुत बड़ा दिन है. आज भारत अपना पहला जनजातीय दिवस मना रहा है. आजादी के बाद देश में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर कला, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन में उनके योगदान को याद किया जा रहा है.
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में इस नए संकल्प के लिए मैं पूरे देश को बहुत-बहुत बधाई देता हूं. मैं आज यहां मप्र के जनजातीय समाज का आभार व्यक्त करता हूं. हमें आपक स्नेह और विश्वास मिला है. यह स्नेह और मजबूत हो रहा है. आपका यह प्यार आपकी सेवा के लिए, दिन रात एक करने के लिए उर्जा देता हैं. साथियों इसी सेवा भाव से शिवराज की सरकार ने कई बड़ी योजनाओं का शुभारंभ किया है
पीएम मोदी ने कहा कि आपने जो कहा वो देशभर के लोगों को आपका एक-एक शब्द जीवन जीने का कारण, इरादा बखूबी प्रस्तुत करता है. जीवन एक दिन मिट्टी में मिल जाएगा. आदिवासी शिक्षित हैं, हम शिक्षित होना बाकी है. मौज मस्ती में समय बिता दिया. जब अंत समय आया तब मन में पछताना व्यर्थ है. धरती खेत खालिहान किसी के नहीं है. अपने मन में गुमान करना व्यर्थ है. धन दौलत किसी काम के नहीं है. इसे यही छोड़कर जाना है. इस संगीत औऱ नृत्य में जो शब्द कहें गए हैं, वो आदिवासियों ने आत्मसाद किया है. इससे बड़ी किसी देश की ताकत क्या हो सकती है. इससे बड़ी पूजी और विरासत क्या हो सकती है ?आज कार्यक्रम में आदिवासी अपने गीत और धूम के साथ अपनी भावनाएं प्रगट कर रहे हैं. मैंने प्रयास किया उन गीतों को समझने के लिए. मेरा अनुभव रहा है कि जीवन का काल खंड आदिवासियों के बीच बिताया है. आदिवासी अपने नाच, गान, गीत परंपरा में बखूबी प्रस्तुत करते हैं. आज के इस गीत में मेरा ध्यान जाना स्वाभाविक था.
उन्होंने आगे कहा कि दसको पहले मैंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी. दूसरे राजनीतिक दल ने आदिवासियों को सुविधाओं से वंचित रखा. उन्हीं सुविधाएं का आश्वासन देकर वोट मांगे. गरीबों को असहाय छोड़ दिया. जब मुझे 2014 में देश का पीएम चुना गया, तब से आदिवासियों और गरीबों को सुविधाएं दी जा रही है. सभी आदिवासी क्षेत्रों में विकास हो रहा है. सभी को खाते में योजनाओं के तहत राशि मिल रही है. सभी को घर-घर नल जल योजना के तहत पानी मिल रहा है. इससे पहले कई वर्षों तक गरीबों को पानी के लिए मोहताज होना पड़ता था. जनजातीय समाज में प्रतिभा की कभी कोई कमी नहीं रही है, लेकिन दुर्भाग्य से पिछली सरकारों ने अवसर नहीं दिया



