छतीसगढ़बिलासपुर

140 दिन गैरहाजिरी पर बर्खास्तगी उचित: बिलासपुर हाई कोर्ट ने BSP के फैसले को माना वैध

बिलासपुर न्यूज धमाका – हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि अनुशासनात्मक मामलों में सजा तय करना प्रबंधन का विशेषाधिकार है, और जब तक सजा न्याय के मापदंडों को झकझोरने वाली न हो, न्यायालय को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। यह फैसला भिलाई स्टील प्लांट (BSP) के एक तकनीशियन कर्मचारी की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनाया गया।


मामले की पृष्ठभूमि:

  • याचिकाकर्ता BSP में कार्यरत एक तकनीशियन था, जो 1 मई 1994 से 17 सितंबर 1994 तक कुल 140 दिनों तक बिना किसी पूर्व अनुमति या सूचना के गैरहाजिर रहा।
  • इससे पहले भी वह कई बार ड्यूटी से बिना बताए गायब हो चुका था। आठ साल की नौकरी के दौरान उसे तीन बार दंडित किया जा चुका था।

प्रबंधन की कार्रवाई:

  • बार-बार की गई लापरवाही के बाद प्रबंधन ने विभागीय जांच करवाई।
  • जांच रिपोर्ट के आधार पर 18 अगस्त 1995 को तकनीशियन को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

श्रम न्यायालय और हाई कोर्ट की कार्यवाही:

  • बर्खास्तगी आदेश को श्रम न्यायालय में चुनौती दी गई, जहाँ कोर्ट ने प्रबंधन के फैसले को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
  • इसके बाद याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
  • सुनवाई जस्टिस एन. के. व्यास की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने पाया कि कर्मचारी की लापरवाही गंभीर अनुशासनहीनता के अंतर्गत आती है।

हाई कोर्ट की टिप्पणी:

  • “अनुशासनात्मक कार्रवाई एक प्रबंधकीय कार्य है।
    जब तक सजा अत्यधिक कठोर या न्याय की अंतरात्मा को झकझोरने वाली न हो, अदालत को प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।”
  • कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का ड्यूटी से गायब रहना उसकी कार्य संस्कृति का हिस्सा बन चुका था।
  • तदनुसार, याचिका को खारिज कर दिया गया।

यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

  • यह निर्णय यह स्पष्ट करता है कि सरकारी व अर्ध-सरकारी संस्थानों में अनुशासन बनाए रखना सर्वोपरि है।
  • यह फैसला यह भी दर्शाता है कि लंबे समय तक अनुपस्थित रहना केवल छुट्टी नहीं, अनुशासनहीनता है।
  • साथ ही यह संस्थानों को यह अधिकार देता है कि वे स्वतंत्र रूप से कार्य नीति का पालन कर सकें, न्यायालय केवल तभी हस्तक्षेप करेगा जब न्याय का घोर उल्लंघन हो।

विश्लेषण:

यह निर्णय कार्यस्थल पर अनुशासन को लेकर न्यायिक व्यवस्था की स्पष्ट सोच को दर्शाता है। यह उन कर्मचारियों के लिए भी चेतावनी है जो बिना सूचना या अनुमति के अनुपस्थित रहने की आदत बना लेते हैं। साथ ही, इससे यह भी स्पष्ट होता है कि न्यायालय प्रबंधन के विवेक में विश्वास करता है जब तक वह विवेक मनमाना नहीं होता।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!