
जशपुर न्यूज़ धमाका – जशपुर जिले के पत्थलगांव तहसील अंतर्गत शिवपुर और गाला गांव में शासकीय भूमि एवं नदी क्षेत्र पर कथित अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। जशपुर जिले के पत्थलगांव तहसील के ग्राम शिवपुर और गाला में शासकीय भूमि एवं नदी क्षेत्र पर कथित अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। नापजोख के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे। आरोप है कि, खसरा नंबर 656 और 657 की शासकीय भूमि पर मिट्टी पाटकर खेत बनाया जा रहा है।
ग्रामीण कर रहें कार्रवाई की मांग
इससे नदी का स्वरूप, सार्वजनिक रास्ता और मरघट स्थल प्रभावित हो रहे हैं। उनका दावा है कि, यह स्थान वर्षों से अंतिम संस्कार और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए उपयोग में लाया जाता रहा है। ग्रामीणों ने कार्रवाई की मांग की है। राजस्व विभाग द्वारा नापजोख और जांच की जा रही है। प्रशासन का कहना है कि, जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, मामले की जांच जारी है। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भारतमाला घोटाले में ED का बड़ा एक्शन
वहीं रायपुर में 4 जून को भारतमाला परियोजना घोटाले में गुरुवार को ईडी ने बड़ी कार्रवाई की है। इस मामले के आरोपी जयप्रकाश गांधी को ED ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार करने के साथ ही ED ने गांधी को कोर्ट में पेश किया। ED की डिमांड पर कोर्ट ने कोर्ट ने जयप्रकाश गांधी को तीन दिन की रिमांड पर सौंपा।
मुआवजे के लिए धोखाधड़ी की चल रही जांच
ED द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय (ED), रायपुर ज़ोनल ऑफ़िस ने 3 जून को छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के अभनपुर के रहने वाले जय प्रकाश गांधी को, भारतमाला हाईवे ज़मीन अधिग्रहण मुआवज़ा धोखाधड़ी मामले के सिलसिले में, मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA), 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ़्तार किया है। ED ने छत्तीसगढ़ के ACB/EOW द्वारा दर्ज FIR के आधार पर जाँच शुरू की थी। यह FIR भारतमाला परियोजना के तहत रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा परियोजना के लिए अधिग्रहित ज़मीन के मुआवज़े के वितरण में बड़े पैमाने पर हुई अनियमितताओं और धोखाधड़ी से संबंधित थी।
ज्यादा मुआवजा पाने के लिए मिलीभगत
ED की जाँच में पता चला कि, जय प्रकाश गांधी ने अपने परिवार के सदस्यों और कुछ सरकारी कर्मचारियों के साथ मिलकर, अधिसूचित हाईवे अलाइनमेंट (सीध) के दायरे में आने वाली ज़मीन को अधिग्रहित किया और बाद में उसे 500 वर्ग मीटर से कम के छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँट दिया। आरोप है कि, ज़मीन का यह बँटवारा सिर्फ़ इस इरादे से किया गया था ताकि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से ज़्यादा मुआवज़ा हासिल किया जा सके।
मिलना था 56.76 लाख, हासिल किए लगभग 9.83 करोड़ रुपये
धोखाधड़ी के इस तरीके को अपनाकर, आरोपी और उसके परिवार के सदस्यों ने, असल में मिलने वाली 56.76 लाख रुपये की रक़म के मुक़ाबले, लगभग 9.83 करोड़ रुपये का मुआवज़ा हासिल किया। इस तरह उन्होंने लगभग 9.27 करोड़ रुपये की ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ (Proceeds of Crime) जमा कर ली। जाँच में यह भी सामने आया है कि इस ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ को बाद में शेयरों, म्यूचुअल फ़ंड और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश करके छिपाया और मुख्यधारा में मिलाया गया।
कई स्थानों पर मारे थे छापे
ED ने 28.04.2026 को इस मामले में रायपुर, अभनपुर और धमतरी ज़िलों में कई जगहों पर तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान, मुआवज़े की धोखाधड़ी से प्राप्ति से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और अन्य सबूत बरामद कर ज़ब्त किए गए थे।
3 दिन के लिए ED की हिरासत में सौंपा
गिरफ़्तार आरोपी को विशेष न्यायालय (PMLA), रायपुर के समक्ष पेश किया गया, जिसने आरोपी को तीन दिनों के लिए ED की हिरासत में भेज दिया है। इस मामले में जाँच अभी जारी है और इस साज़िश में शामिल अन्य लाभार्थियों, बिचौलियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका की जाँच की जा रही है।



