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अनुकंपा नियुक्ति पर हाईकोर्ट की सख्ती: पत्नी थी सेवा में, इसलिए बेटे को नहीं मिलेगा नौकरी का लाभ

बिलासपुर न्यूज धमाका – 12 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग लेकर हाईकोर्ट पहुंचे युवक को झटका। बिलासपुर हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि मृत कर्मचारी की पत्नी स्वयं सेवा में थी, तो अन्य परिजनों को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता।

क्या है मामला?

बिलासपुर के यदुनंदन नगर निवासी गणेश नायडू, जो हाईकोर्ट में भृत्य थे, की 2010 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। उस समय उनकी पत्नी पूजा नायडू पहले से ही हाईकोर्ट में कार्यरत थीं। बाद में पूजा की भी सेवा काल में मृत्यु हो गई और उनकी बेटी ऋचा नायडू को अनुकंपा नियुक्ति दी गई, जो बाद में रद्द कर दी गई।

2022 में नीलकांत नायडू नामक युवक सामने आया और दावा किया कि वह गणेश नायडू और उनकी पहली पत्नी रेशमा का बेटा है। उसने पिता की मृत्यु के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति की मांग की।

हाईकोर्ट का फैसला क्या रहा?

  • अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता, मृत कर्मचारी का बेटा होने का ठोस सबूत नहीं दे पाया।
  • सेवा पुस्तिका, परिवार सूची, और पत्नी का हलफनामा याचिकाकर्ता के दावे के खिलाफ थे।
  • हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक की पत्नी उस समय सेवा में थी, अतः नियमानुसार किसी अन्य परिजन को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार नहीं बनता।

क्या कहा गया दस्तावेज़ों में?

  • पूजा नायडू ने हलफनामे में कहा था कि उनके और गणेश की केवल एक बेटी ऋचा है।
  • नीलकांत का नाम परिवार सूची में नहीं था।
  • याचिकाकर्ता द्वारा पेश किया गया मृतक की भाभी का शपथपत्र पर्याप्त नहीं माना गया।

कोर्ट का अंतिम निर्णय:

बिलासपुर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को पहले सिविल कोर्ट में जाकर यह साबित करना होगा कि वह मृत कर्मचारी का पुत्र है। जब तक वैधानिक रूप से यह संबंध स्थापित नहीं होता, अनुकंपा नियुक्ति का कोई दावा मान्य नहीं होगा।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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