
75 साल पुरे कर चुका है ये अस्पताल, ब्रिटिश शासन काल में बना था अस्पताल भवन।
लोक निर्माण विभाग कोण्डागांव उक्त अस्पताल भवन को कंडम घोषित कर चुका है।
कोंडागॉंव जिला मुख्यालय और शहर के अंदर बने पीएचसी प्राथमिक हेल्थ सेंटर अब खुद ही बीमार है। इसकी छतों को प्लास्टिक की पोलिथिनो से ढक कर रस्सियों से बांध कर रखा गया है। इसके नीचे ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर कोण्डागांव डाॅ सूरज राठौर समेत और डॉक्टर व अस्पताल का स्टाफ बैठ कर लोगो का उपचार करता है । जबकि सबसे ज्यादा अभी इस अस्पताल को ही उपचार की जरूरत है।
नगर के बस स्टैण्ड पर स्थित है ये अस्पताल – ये जिले का सब से महत्वपूर्ण अस्पताल इसलिए भी है क्योंकि सारे टीकाकरण से ले कर प्राथिमक उपचार के लिए नगर केे लोग सब से ज्यादा यंही पर आते है, क्योंकि यह नगर के केन्द्र में स्थित है। जिला अस्पताल नगर से बाहर कई किमी दूर हैं। जरूरत पड़ने पर ही जिला अस्पताल जो शहर से 3 किलोमीटर दूर है वंहा जाते है। जिला मुख्यालय के साथ ही इस अस्पताल में जिले भर से आने वाले मरीज पहले यंही पहुंचते है। पर खुद इसकी हालात बेहद जर्जर हो चुकी है। मुख्यालय के अस्पताल को देख सहज ही अंदाज लगाया जा सकता है कि जिले के अंदर बाकी अस्पतालों की क्या दशा होगी ।
10 बेड की मांग भी अब तक अधूरी – आम जनता भी लंबे समय से इस अस्पताल को 10 बेड का करने की मांग भी कर रही है क्योंकि अचानक से कोई केस आता है तो शहर के लोगों को सीधे रात बेराम तुरंत उपचार यंहा मिल सकता है। पर आजतक 10 बिस्तर अस्पताल भी नही हो सका है। शाम होते ही ताला बंद हो जाता है फिर आपके पास सीधे जिला अस्पताल जाने के कोई दूसरा विकल्प ही नहीं बचता है।
ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ सूरज राठौर- लोक निर्माण विभाग उक्त अस्पताल भवन को कंडम घोषित कर चुका है । जब तक नया भवन नहीं बनता है तब तक कुछ नही कर सकते । व्यवस्था के तौर पर हम अस्पताल की छत पर पोलीथिन लगा कर यहीं स्वास्थ सुविधायें संचालित कर रहे हैं। पर पूरा भवन में पानी टपकता है दीवारे भी जर्जर हो चुकी है।
