
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के शिक्षक (पंचायत) संवर्ग को क्रमोन्नत वेतनमान को लेकर बड़ा झटका लगा है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने हाई कोर्ट में याचिका दायर करने वाले 62 शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत सभी अभ्यावेदनों को खारिज कर दिया है। विभाग ने यह फैसला सुप्रीम कोर्ट द्वारा शिक्षिका सोना साहू के मामले में दिए गए आदेश और हाई कोर्ट के निर्देशों के आधार पर लिया है।
सोना साहू प्रकरण बना आधार, पर बाकी शिक्षकों को राहत नहीं
शिक्षिका सोना साहू की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद, अन्य शिक्षकों को भी उम्मीद जगी थी। उन्होंने अपने वकीलों के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर कीं और क्रमोन्नत वेतनमान एवं एरियर्स की मांग की। परंतु पंचायत विभाग ने स्पष्ट किया कि सोना साहू का मामला विशिष्ट था और उसका सामान्यीकरण अन्य मामलों पर नहीं किया जा सकता।
पंचायत विभाग का आदेश: एरियर्स का अधिकार नहीं
जारी आदेश में कहा गया है कि 10 मार्च 2017 के परिपत्र का प्रभाव संविलियन तिथि के बाद ही लागू होता है, जब शिक्षक स्कूल शिक्षा विभाग के एल.बी. संवर्ग में आए। संविलियन से पहले, शिक्षक केवल समयमान वेतनमान के पात्र थे, न कि एरियर्स के। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि हाई कोर्ट के आदेश (28 फरवरी 2024) के अनुसार, काल्पनिक वेतन निर्धारण किया जा सकता है, लेकिन एरियर्स भुगतान का अधिकार नहीं बनता।
किसने किए थे अभ्यावेदन?
- महेंद्र कुमार कोरी एवं 5 अन्य
- गोपाल जैन एवं 7 अन्य
- हेमिन पिस्दा एवं 2 अन्य
- निर्मल कुमार विश्वकर्मा एवं 12 अन्य
- मधुस्मिता दास एवं 4 अन्य
- चंद्रप्रभा यादव एवं 10 अन्य
- अरविंद कुमार द्विवेदी एवं 13 अन्य
- केदारनाथ सुनहरे
- भरतलाल कैवर्त
अब निर्णय स्कूल शिक्षा विभाग को लेना है
पंचायत विभाग ने यह कहते हुए अपना दायित्व समाप्त किया कि अब यह विषय स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकार क्षेत्र में आता है, क्योंकि याचिकाकर्ता अब शिक्षक (एल.बी.) संवर्ग में शामिल हैं। इस आधार पर अभ्यावेदनों का निराकरण शिक्षा विभाग को करना होगा।
जिला पंचायतों को निर्देश
प्रदेशभर के जिला पंचायत सीईओ को भेजे गए पत्र में यह हिदायत दी गई है कि सभी मामलों की सावधानीपूर्वक विवेचना कर, प्रकरण के विशिष्ट गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाए, जिससे अवमानना की स्थिति न बने।
