
रायपुर न्यूज धमाका – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश को हरित ऊर्जा की दिशा में आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अहम कदम उठाया है। राज्य के सभी नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट और कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण हेतु बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित किए जाएंगे।
प्रमुख बिंदु:
- रायपुर, भिलाई सहित 8 नगरीय निकायों में जमीन चिन्हित।
- बीपीसीएल और गेल लगाएंगे ₹800 करोड़ की लागत से संयंत्र।
- सार्वजनिक उपक्रमों को ₹1 प्रति वर्गमीटर की रियायती दर पर 10 एकड़ जमीन 25 साल की लीज पर दी जाएगी।
- संयंत्रों में बायोसीएनजी के साथ तरल उर्वरक का भी उत्पादन होगा।
कैबिनेट का निर्णय और उद्देश्य
17 अप्रैल को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया कि सार्वजनिक उपक्रमों को रियायती लीज दर पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। इसका उद्देश्य है देश में सीएनजी आयात पर निर्भरता कम करना और स्थानीय जैव अपशिष्ट का उपयोग कर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना।
बायो-सीएनजी के लाभ
बायोसीएनजी, जिसे बायो कंप्रेस्ड नेचुरल गैस कहा जाता है, मुख्य रूप से वाहन ईंधन, घरेलू ऊर्जा, खाना पकाने, बिजली उत्पादन और औद्योगिक प्रक्रियाओं में उपयोग की जाती है। इसका उत्पादन पशु अपशिष्ट, खाद्य अपशिष्ट और औद्योगिक कीचड़ से किया जाता है, जिससे 95% शुद्ध मीथेन गैस प्राप्त होती है।
अगले कदम
नगरीय प्रशासन विभाग ने बताया कि चिन्हित क्षेत्रों में संयंत्र निर्माण हेतु टेंडर प्रक्रिया एक महीने के भीतर शुरू की जाएगी। टेंडर फाइनल होने के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
राष्ट्रीय लक्ष्य से तालमेल
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार भारत में 70 मिलियन मीट्रिक टन बायो-सीएनजी उत्पादन की क्षमता है। छत्तीसगढ़ सरकार की यह पहल हरित ऊर्जा लक्ष्य और आत्मनिर्भर भारत के उद्देश्य को बल देगी।
