
रायपुर न्यूज धमाका – देश की प्रमुख ट्रेड यूनियनों और किसान संगठनों ने 9 जुलाई को एकदिवसीय देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। करीब 20 करोड़ मजदूर और किसान इस आंदोलन में शामिल होंगे। आंदोलन की मुख्य मांग केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स) को तत्काल वापस लेने की है।
प्रेस वार्ता में किया ऐलान
छत्तीसगढ़ में ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच के संयोजक धर्मराज महापात्र ने रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि केंद्र सरकार ने महामारी के दौरान मजदूरों के 44 पुराने श्रम कानूनों को समाप्त कर चार नए श्रम कोड लागू किए, जो मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करते हैं। यूनियनों का आरोप है कि इन कानूनों से यूनियन बनाना कठिन हो गया है और हड़ताल जैसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर भी प्रतिबंध लग गया है।
आरोप: श्रमिकों के अधिकार छीने जा रहे हैं
नेताओं ने कहा कि नए कानूनों के तहत:
- काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 किए गए हैं
- ई.पी.एफ. अंशदान 12% से घटाकर 10% किया गया है
- ठेका प्रथा, आउटसोर्सिंग और निश्चित अवधि की नियुक्तियों को बढ़ावा दिया जा रहा है
- यूनियन की मान्यता और हड़ताल पर कठोर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं
- मजदूरों को बिना नोटिस नौकरी से निकाला जा सकता है
23 सूत्रीय मांगों में ये प्रमुख बिंदु शामिल
- श्रम संहिताएं तुरंत रद्द की जाएं
- ₹26,000 न्यूनतम मजदूरी लागू की जाए
- पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए
- सभी असंगठित मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा
- आंगनबाड़ी, मिड डे मील, मितानिन, गिग वर्कर्स को श्रमिक का दर्जा
- मनरेगा में 200 दिन रोजगार और वेतनवृद्धि
- प्राकृतिक आपदाओं में किसानों के लिए विशेष राहत कोष
- शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का निजीकरण रोका जाए
केंद्र सरकार पर आरोप
महापात्र ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि श्रमिकों को मालिकों का ‘गुलाम’ बनाने की नीति अपनाई जा रही है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 जोड़कर ट्रेड यूनियनों की हड़ताल और विरोध को संगठित अपराध की श्रेणी में शामिल किया जा रहा है।
विशेष जानकारी के लिए:
हड़ताल की तिथि: 9 जुलाई 2025
संयुक्त मंच का प्रतिनिधित्व: ट्रेड यूनियन्स, किसान संगठनों, मनरेगा, आंगनबाड़ी, शिक्षाकर्मी, बैंक/बीमा कर्मचारी, असंगठित क्षेत्र के कामगार आदि



