
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ की जर्जर सड़कों को लेकर बिलासपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। बारिश के मौसम में दुर्घटनाओं और जानमाल की हानि के मामलों को देखते हुए हाईकोर्ट ने सवाल उठाया – “क्या अब राज्य में सड़कें भी कोर्ट की निगरानी में बनेंगी?”
यह टिप्पणी मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बी.डी. गुरु की डिवीजन बेंच ने एक जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई के दौरान दी। अदालत ने कहा कि अगर कोर्ट ध्यान न दे, तो ऐसा लगता है जैसे विभाग काम करना ही बंद कर देंगे।
सरकारी अफसरों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
सुनवाई के दौरान डिवीजन बेंच ने साफ कहा कि बिलासपुर, रायपुर सहित प्रदेशभर की सड़कों की हालत चिंताजनक है। अदालत ने अफसरों से पूछा कि पेंड्रीडीह बाइपास से नेहरू चौक तक का सड़क निर्माण कार्य अप्रैल तक पूरा होना था, फिर अब तक अधूरा क्यों है? रायपुर का धनेली एयरपोर्ट रोड, सेंदरी बाइपास का प्रस्तावित ओवरब्रिज, अधूरे डीपीआर और स्वीकृत फंड के बाद भी अधूरे कामों को लेकर भी कोर्ट ने सख्त सवाल किए।
कोर्ट ने जताई गहरी नाराजगी
डिवीजन बेंच ने कहा – “यह स्थिति बेहद पीड़ाजनक है। क्या सिर्फ कोर्ट के कहने पर ही काम होगा?”
अदालत ने राज्य सरकार से कहा कि प्रदेशभर की सड़कों की स्थिति पर शपथ पत्र के साथ जवाब प्रस्तुत करें। साथ ही स्पष्ट किया कि यह काम कोर्ट का नहीं, शासन का है – और जिम्मेदारी निभाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
4 अगस्त तक मांगा जवाब
राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 4 अगस्त तय कर दी है।
निष्कर्ष:
छत्तीसगढ़ की सड़कों की स्थिति को लेकर हाईकोर्ट की सख्ती राज्य शासन के लिए स्पष्ट चेतावनी है। यदि तय समय में सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो न्यायालय इस मामले में और भी कठोर रुख अपना सकता है।
