
अंबिकापुर न्यूज धमाका – अंबिकापुर में कांग्रेस द्वारा किए गए आर्थिक नाकेबंदी प्रदर्शन ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। कांग्रेस ने इसे ईडी (ED) के दुरुपयोग और राजनीतिक प्रतिशोध करार देते हुए पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को भाजपा प्रायोजित बताया।
बनारस रोड पर 2 घंटे की नाकेबंदी, अदानी-अंबानी के खिलाफ नारेबाजी
सोमवार दोपहर 12 बजे कांग्रेस कार्यकर्ता बीटीआई कॉलेज के सामने इकट्ठा हुए और बनारस रोड को जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक रास्ता अवरुद्ध रहा, जिससे आम नागरिकों को खासी परेशानी हुई। कार्यकर्ताओं ने अदानी और अंबानी के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल हो रहा है।
टीएस सिंहदेव का तीखा हमला
पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा:
“यह सिर्फ चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी का मामला नहीं है। यह पूरे तंत्र के दुरुपयोग का उदाहरण है। रातों-रात 200–300 एकड़ जंगल साफ कर दिए गए ताकि एक निजी कंपनी अपना प्रोजेक्ट शुरू कर सके। कांग्रेस इसका विरोध करती है।”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि रॉबर्ट वाड्रा पर भी ईडी ने कार्रवाई की थी, और इन कार्रवाइयों का एक ही मकसद है — विरोध की आवाज को दबाना।
अमरजीत भगत: “कांग्रेस डरने वाली नहीं”
पूर्व मंत्री अमरजीत भगत ने आरोप लगाया:
“पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अडानी-अंबानी के खिलाफ आवाज उठाई थी, और इसी का बदला भाजपा अब चुकता कर रही है। ईडी का इस्तेमाल कर चैतन्य को निशाना बनाया गया है।”
भाजपा का पलटवार: “कांग्रेस गुमराह कर रही जनता को”
वहीं भाजपा ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन को जनता को भ्रमित करने की कोशिश करार दिया। लुण्ड्रा विधायक प्रमोद मिंज ने कहा:
“कांग्रेस के कई नेता खुद घोटालों में शामिल हैं। कुछ बेल पर हैं, कुछ जेल में हैं। ईडी एक स्वतंत्र एजेंसी है जो भ्रष्टाचार के मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है। कांग्रेस मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए सड़क पर ड्रामा कर रही है।”
जनता परेशान, प्रशासन सतर्क
प्रदर्शन के चलते आम जनजीवन बाधित हुआ। दो घंटे तक यातायात ठप रहा, जिससे स्कूल, दफ्तर और व्यवसायिक कामकाज पर असर पड़ा। प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया।
निष्कर्ष:
एक ओर कांग्रेस इसे राजनीतिक प्रतिशोध और पर्यावरणीय दोहन का मुद्दा बता रही है, वहीं भाजपा इसे कानूनी प्रक्रिया और भ्रष्टाचार के खिलाफ ईडी की कार्रवाई बता रही है। असली सवाल यह है कि क्या राजनीतिक बयानबाजी के बीच आम नागरिकों की समस्याएं और सवाल पीछे छूट रहे हैं?



