रसिया व यूक्रेन,न्यूज़ धमाका :-रूस ने जब से यूक्रेन पर चौतरफा हमला किया है, वहां पर स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। हालांकि अब बातचीत की पैरवी जरूर की जा रही है, लेकिन जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। रूस की सेना लगातार हमले कर रही है। मिसाइलें दागी जा रही हैं, रॉकेट छोड़े जा रहे हैं और यूक्रेन के कई क्षेत्रों पर अपना कब्जा जमाने की कोशिश हो रही है। इधर इस बीच यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने शुक्रवार को अपने भारतीय समकक्ष एस. जयशंकरसे बात की तथा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में, रूस के हमले की निंदा और इसे समाप्त करने वाले प्रस्ताव पर भारत के समर्थन का आग्रह किया।
टेलीफोन पर हुई बातचीत में, कुलेबा ने जयशंकर से आग्रह किया कि वह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव पर समर्थन देने के अलावा रूस पर भारत के प्रभाव का इस्तेमाल कर “सैन्य आक्रमण” को रोकने का प्रयास करें। जयशंकर ने एक ट्वीट में कहा कि भारत वर्तमान स्थिति से निपटने के लिए वार्ता और कूटनीतिक माध्यम का पक्षधर है। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में फंसे भारतीय नागरिकों को निकालने के लिए उन्होंने कुलेबा से बात की।
उधर रूस के यूक्रेन पर हमला के बाद अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया। शुक्रवार को वोटिंग कराया गया। हालांकि, रूस के वीटो की वजह से प्रस्ताव पास नहीं हो सका। लेकिन भारत, यूएई व चीन ने रूस के खिलाफ वोटिंग नहीं की है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत और चीन ने यूक्रेन पर आक्रमण की निंदा करते हुए सुरक्षा परिषद के वोट से परहेज किया। पश्चिम देशों में प्रतिबंधों के लगातार ऐलान हो रहे हैं। रूस पर प्रतिबंध के बाद यूरोपियन यूनियन के अलावा अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन सरीखे राष्ट्रों ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन व रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव पर व्यक्तिगत प्रतिबंधों वाले व्यक्तियों की लिस्ट में डाल दिया गया है।
इस जंग का सबसे ज्यादा असर यूक्रेन की उस आम जनता पर पड़ा है जो अपना ही घर छोड़ने को मजबूर हो गई है। यूएन की मानें तो पिछले 48 घंटे के अंदर पचास हजार से ज्यादा यूक्रेन के नागरिकों ने अपने ही देश को छोड़ दिया है। अभी के लिए हर कोई सिर्फ अपनी जान बचाने के बारे में सोच रहा है। सड़कों पर लंबा जाम है, लोगों के बीच बेचैनी है और अपने प्रियजनों संग किसी सुरक्षित ठिकाने पर जाने की होड़ है। वैसे कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में पलायन थम सकता है क्योंकि अब दोनों रूस और यूक्रेन बातचीत की टेबल पर आ गए हैं। तारीख तय नहीं हुई है लेकिन जल्द ही बड़ा फैसला लिया जा सकता है।



