
11 अगस्त 2026 //
डॉ. शरद चंद्र भैया ब्लैक होल पुस्तक – उम्र के इस पड़ाव में भी विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और कुछ नया करने का जुनून कायम रखना अपने आप में प्रेरणादायक है। पूर्व भौतिकी व्याख्याता डॉ. शरद चंद्र भैया ने ब्लैक होल जैसे जटिल और रहस्यमय विषय पर ‘जर्नी इनटू ब्लैक होल्स’ नाम से पुस्तक लिखकर यह साबित किया है कि सीखने और ज्ञान साझा करने की कोई उम्र नहीं होती। उनकी यह पुस्तक खास तौर पर युवा पाठकों और विद्यार्थियों को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है, ताकि वे ब्लैक होल, अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे विषयों को सरल तरीके से समझ सकें।
पुस्तक का औपचारिक विमोचन भिलाई के बीएसपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-10 में शिक्षकों और विद्यार्थियों की मौजूदगी में किया गया। इस दौरान विज्ञान से जुड़े एक चुनौतीपूर्ण और रोचक विषय को युवा पाठकों के लिए अधिक सहज तरीके से सामने रखने की कोशिश की गई। कार्यक्रम में छात्रों को पारंपरिक कक्षा-शिक्षण से आगे बढ़कर वैज्ञानिक विषयों को समझने और उनके बारे में सवाल पूछने के लिए प्रेरित किया गया।
ब्लैक होल के रहस्यों को आसान भाषा में समझाने की कोशिश
ब्लैक होल लंबे समय से वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों की जिज्ञासा का विषय रहे हैं। ब्रह्मांड में मौजूद इन रहस्यमय संरचनाओं को लेकर आज भी कई सवाल वैज्ञानिक अध्ययन का हिस्सा हैं। ऐसे विषय को विद्यार्थियों के सामने सरल तरीके से रखना ‘जर्नी इनटू ब्लैक होल्स’ की प्रमुख विशेषता है।
डॉ. भैया ने पुस्तक के माध्यम से ब्लैक होल से जुड़ी वैज्ञानिक अवधारणाओं को इस तरह प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि विद्यार्थी विषय की जटिलता से घबराए बिना उसे समझ सकें और उसके प्रति अपनी रुचि विकसित कर सकें।
पुस्तक का उद्देश्य केवल ब्लैक होल के बारे में जानकारी देना नहीं है, बल्कि युवा मन में वैज्ञानिक सोच और खोज की भावना को बढ़ावा देना भी है। इसके जरिए विद्यार्थियों को सवाल पूछने, चीजों को अपने नजरिए से समझने और ब्रह्मांड से जुड़े विषयों को जानने के लिए प्रोत्साहित करने का प्रयास किया गया है।
छात्रों से सीधे संवाद, सवालों के दिए जवाब
पुस्तक विमोचन के दौरान डॉ. शरद चंद्र भैया ने विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने ब्लैक होल से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सरल भाषा में समझाया और छात्रों की जिज्ञासाओं का जवाब दिया।
इस संवाद ने विद्यार्थियों को विषय को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसके बारे में सीधे सवाल करने और अपनी समझ विकसित करने का अवसर दिया। ब्लैक होल जैसे विषय के प्रति छात्रों की रुचि और जिज्ञासा को देखते हुए कार्यक्रम विज्ञान को समझने के एक संवादात्मक माध्यम के रूप में भी सामने आया।
विज्ञान और युवा जिज्ञासा के बीच दूरी कम करने की पहल
‘जर्नी इनटू ब्लैक होल्स’ को केवल किसी एक वैज्ञानिक विषय पर लिखी पुस्तक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे लेखक का व्यापक उद्देश्य युवाओं को वैज्ञानिक खोज और अनुसंधान की दिशा में प्रेरित करना भी है।
ब्लैक होल जैसे विषय को छात्र-अनुकूल प्रारूप में पेश करके पुस्तक सवाल पूछने की आदत, स्वतंत्र सोच और ब्रह्मांड के प्रति जिज्ञासा को बढ़ावा देने की कोशिश करती है। यही जिज्ञासा आगे चलकर विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में रुचि का आधार बन सकती है।
पुस्तक का संदेश भी इसी विचार के आसपास केंद्रित है कि ब्रह्मांड को लेकर उठने वाला एक सवाल विज्ञान की गहरी यात्रा की शुरुआत हो सकता है।
अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान में रुचि बढ़ाने पर जोर
आज अंतरिक्ष विज्ञान और खगोल विज्ञान को लेकर युवाओं में लगातार रुचि बढ़ रही है। ऐसे समय में ब्लैक होल जैसे विषय को सरल भाषा में उपलब्ध कराना विद्यार्थियों को इस क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में उपयोगी कदम हो सकता है।
‘जर्नी इनटू ब्लैक होल्स’ के जरिए डॉ. भैया ने विद्यार्थियों और सामान्य पाठकों के लिए ब्लैक होल तथा अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़ी चर्चाओं को अधिक सुलभ बनाने का प्रयास किया है। पुस्तक छात्रों को वैज्ञानिक तथ्यों को समझने के साथ-साथ उनके पीछे छिपे सवालों पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती है।

लेखक के बारे में
डॉ. शरद चंद्र भैया सेक्टर-10 स्थित बीएसपी सीनियर सेकेंडरी स्कूल से जुड़े पूर्व भौतिकी व्याख्याता हैं। ‘जर्नी इनटू ब्लैक होल्स’ के माध्यम से उन्होंने ब्लैक होल के विषय को विद्यार्थियों के लिए सहज तरीके से प्रस्तुत करने और उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान तथा वैज्ञानिक अनुसंधान के प्रति अधिक रुचि लेने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया है।
पुस्तक: जर्नी इनटू ब्लैक होल्स
लेखक: डॉ. शरद चंद्र भैया
विषय: ब्लैक होल, अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान और वैज्ञानिक अनुसंधान


