छतीसगढ़राजनांदगांव

07 जून 2026 // अकेले राजनांदगांव जिले में 531 स्कूलों को मरम्मत की दरकार सरकारी स्कूलों की हालत खराब

राजनंदगांव न्यूज़ धमाका – स्कूलों की बदहाल व्यवस्था वर्षों से एक ही ढर्रे पर चलती हुई नजर आ रही है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार की तमाम कोशिशे केवल योजनाओं तक सीमित दिखाई देती है ।

 स्कूलों की बदहाल व्यवस्था वर्षों से एक ही ढर्रे पर चलती हुई नजर आ रही है। शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार की तमाम कोशिशे केवल योजनाओं तक सीमित दिखाई देती है । इसका धरातल पर क्रियान्वयन नजर नहीं आता है। जिले की सैकड़ों जर्जर स्कूलों में बच्चे अध्ययन करने मजबूर है। जिससे हादसों का खतरा होने के साथ ही असुविधाएं व्याप्त है। 

जर्जर शाला भवन और संसाधनों में कमी को लेकर शिक्षा विभाग के माध्यम से प्रतिवर्ष जर्जर स्कूलों को चिन्हित किया जाता है। जिसकी मरम्मत के लिए उच्च स्तर पर पत्राचार भी होता है। लेकिन शाला भवन की स्थिति को सुधारने के लिए सारे प्रयास सिर्फ कागजों तक ही सिमित दिखाई देते हैं और जमीनी स्तर पर इसकी हकीकत काफी दूर नजर आती है। जिसके चलते बच्चे इन्हीं जर्जर भवन और टूटे फर्नीचर में बैठकर पढ़ने मजबूर हो रहे हैं।

जिले में बीते दो-तीन वर्षों से शिक्षा विभाग के माध्यम से जर्जर स्कूल भवनों को चिन्हित तो किया गया है, लेकिन इसकी मरम्मत नहीं हो पा रही है। जिले में 531 भवन मरम्मत योग्य हैं जहां कक्षाएं भी संचालित होती है। संबंधित विभाग की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मरम्मत योग्य भवन होने के बाद भी नौनिहालों को जर्जर भवनों में पढ़ाया जा रहा है।

कार्य की गति धीमी 
सत्र 2025-26 में शासन द्वारा भवन की आवश्यकता अनुसार 12 शासकीय शालाओं में नवीन भवन निर्माण कार्य हेतु 2 करोड़ 49 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। वहीं अतिरिक्त कक्ष निर्माण हेतु कुल 122 शालाओं के लिए लगभग 23 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। लेकिन सभी पर कार्य की गति काफी धीमी बनी हुई है।

16 जून से स्कूलों के पट बच्चों की शिक्षा अध्ययन के लिए खुल जाएंगे लेकिन इससे पहले स्कूल में व्याप्त समस्याओं को दूर करने के लिए काम नहीं किया गया है। जिले में चिन्हित जर्जर स्कूलों के भवन काम मरम्मत नहीं होने से इस सत्र में भी बच्चे गिरते प्लास्टर और टपकती छत के बीच शिक्षा ग्रहण करने मजबूर होंगे।

प्रसाधन के दरवाजे भी जर्जर
शासकीय स्कूलों में शौचालय तो है लेकिन दरवाजे टूटे हुए हैं। कुछ जगहों पर तो बालक और बालिकाओं के लिए पृथक शौचालय भी नहीं है। कुछ स्कूलों में विद्यार्थी और शिक्षक एक ही प्रसाधन का उपयोग करते हैं। आलम यह है कि जिले 182 शासकीय स्कूलों में अब तक बालिका- शौचालय निर्माण कार्य की स्वीकृति नहीं हुई है।

जिले में स्कूल के 107 पुराने भवन हैं, जिसका उपयोग वर्तमान में नहीं हो रहा है, लेकिन यह भवन स्कूल परिसर में होने के चलते खतरे का सबब बने हुए हैं, इन्हें जमीदोज करने की आवश्यकता है, लेकिन संबंधित स्कूल प्रशासन के द्वारा पत्राचार करने के बाद भी ऐसे चिन्हित जर्जर भवनों को डिस्मेंटल नहीं किया जा रहा है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

स्टेट हेेड छत्तीसगढ साधना प्लस न्यूज ( टाटा प्ले 1138 पर ) , चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // जिला उपाध्यक्ष प्रेस क्लब कोंडागांव ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता // हमारे YOUTUBE चैनल से भी जुड़ें CG SADHNA PLUS NEW

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