
बिलासपुर न्यूज धमाका – बिलासपुर हाई कोर्ट ने अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट कर दिया है कि तलाक की डिक्री जारी होने के बाद पत्नी का पति की संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार नहीं रहता। यह फैसला संपत्ति विवाद में दाखिल एक याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया है।
कोर्ट ने कहा – विवाह विच्छेद के बाद खत्म हो जाता है पत्नी का दर्जा
जस्टिस एन.के. व्यास की सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए कहा कि एक बार परिवार न्यायालय से तलाक की डिक्री जारी हो जाने के बाद पति और पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध समाप्त हो जाते हैं। इसके बाद महिला का पति की संपत्ति पर दावा करने का कोई कानूनी आधार नहीं रहता।
इस निर्णय के साथ ही हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पत्नी की याचिका को खारिज कर दिया, जिसने अपने पूर्व पति की संपत्ति पर कब्जा कर रखा था।
सिविल कोर्ट ने पहले ही सुनाया था बेदखली का आदेश
मामले की शुरुआत तब हुई जब तलाकशुदा महिला ने रायगढ़ स्थित मकान पर कब्जा कर लिया। मकान पति ने वर्ष 2005 में खरीदा था और उसे किराये पर दे रखा था। तलाक के बाद महिला ने कुछ लोगों के साथ मिलकर मकान पर जबरन कब्जा कर लिया।
पति ने सिविल कोर्ट में याचिका दायर कर अपनी संपत्ति को मुक्त कराने की मांग की। अदालत को बताया गया कि महिला उसकी पूर्व पत्नी है, जिसके आधार पर सिविल कोर्ट ने बेदखली का आदेश पारित किया।
महिला ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन यहां भी उसे राहत नहीं मिल पाई।
हाई कोर्ट के फैसले के प्रमुख बिंदु:
- तलाकशुदा महिला को पति की संपत्ति पर हक नहीं।
- डिक्री जारी होते ही पत्नी का वैवाहिक दर्जा समाप्त हो जाता है।
- संपत्ति पर कब्जा करना अवैध।
- महिला की याचिका खारिज, सिविल कोर्ट का आदेश बरकरार।
पुलिस में मामला दर्ज
पति की शिकायत पर स्थानीय पुलिस ने पूर्व पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर बेदखली की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
न्यायिक टिप्पणी
“कानून के अनुसार, विवाह विच्छेद के बाद पूर्व पत्नी का पति की चल-अचल संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रहता। ऐसी किसी भी संपत्ति पर दावा न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।”
— जस्टिस एन.के. व्यास, बिलासपुर हाई कोर्ट
