
जगदलपुर न्यूज धमाका – कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में 5 दिन पूर्व हुए हिरण के अवैध शिकार मामले में वन विभाग ने सख्त कार्रवाई करते हुए चार शिकारियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। मृत हिरण का विधिपूर्वक अंतिम संस्कार किया गया, वहीं घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश अब भी जारी है।
शिकार के बाद सक्रिय हुआ वन अमला, विशेष जांच दल ने पकड़े आरोपी
वन विभाग ने इस मामले को गंभीर वन्य अपराध मानते हुए सीनियर अफसरों की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। जांच के दौरान मुखबिरों से मिली सूचना पर तीरथगढ़ के पटेलपारा से चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ में आरोपियों ने हिरण के शिकार की बात कबूल कर ली।
इन सभी के खिलाफ वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 की धाराओं के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
वन विभाग ने अपनाया सतर्क रुख
कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के वरिष्ठ अधिकारी संदीप बलगा ने बताया कि गश्त बढ़ा दी गई है और गुप्तचर तंत्र को और सशक्त किया जा रहा है। उनके अनुसार:
“वन्य जीवों का अवैध शिकार न केवल कानूनन अपराध है बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी विनाशकारी है। विभाग इस पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपना रहा है।”
ग्रामीणों को दी जा रही जागरूकता की सलाह
वन विभाग ने क्षेत्र के तीरथगढ़, पैदावाड़ा, दरभा और कोटमसर जैसे गांवों में जागरूकता अभियान चलाया है। ग्रामीणों को बताया जा रहा है कि यदि उन्हें वन्य प्राणियों की कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो वे तुरंत विभाग को सूचना दें, न कि शिकार करें।
निष्कर्ष:
कांगेर घाटी में वन्य जीव संरक्षण को लेकर विभाग की तत्परता और कठोर कार्रवाई यह संदेश देती है कि वन्य प्राणियों के शिकार पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। साथ ही, ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी से ही इस तरह के अपराधों को रोका जा सकता है।
