
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में शासकीय जमीन को निजी बताकर उसे 6 लोगों को बेचने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने एक ही जमीन को कई लोगों को बेचकर करीब 30 लाख रुपए की ठगी की। पीड़ितों द्वारा कोर्ट में नामांतरण के लिए आवेदन देने के बाद खुलासा हुआ कि जमीन सरकारी है। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि ऐसी जमीन की रजिस्ट्री कैसे हो गई।
मामला सरकंडा थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने बताया कि रामनगर चिंगराजपारा निवासी संजय कुमार जायसवाल, जो पेशे से कारपेंटर हैं, उन्होंने सीपत रोड से बहतराई रोड के बीच खसरा नंबर 270 से 900 वर्गफीट जमीन खरीदने का सौदा किया था। यह सौदा नदीम अहमद (निवासी टिकरापारा) से 700 रुपए प्रति वर्गफीट की दर पर तय हुआ।
ऐसे की गई थी डील:
- 18 जनवरी 2024: इकरारनामा बना, 1 लाख रुपए RTGS से दिए गए।
- 26 अप्रैल 2024: रजिस्ट्री ऑफिस में दो गवाहों की उपस्थिति में शेष 4.19 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
- रजिस्ट्री शुल्क के रूप में 81 हजार और 60 हजार रुपए का अतिरिक्त भुगतान भी किया गया।
नामांतरण के लिए जब संजय ने आवेदन किया, तो कोर्ट ने जमीन को शासकीय (सरकारी) घोषित करते हुए आवेदन खारिज कर दिया। जब पीड़ित ने पैसे की वापसी मांगी, तो आरोपी ने टालमटोल की और बाद में तीन चेक दिए, जो बैंक में बाउंस हो गए।
बाकी पीड़ितों से भी ठगी:
पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि उसी जमीन को बेचने का झांसा देकर अन्य लोगों से भी लाखों रुपए वसूले गए:
- संतोषी साहू: ₹4.75 लाख
- रानी साहू: ₹4.50 लाख
- मुनई राम साहू: ₹7.41 लाख
- मंजू धूरी: ₹1 लाख
- शशि बाई साहू: ₹7.07 लाख
कुल ठगी की रकम: ₹30 लाख
सरकंडा पुलिस ने नदीम अहमद, रमेश कुमार यादव (साईं विहार, दुर्ग निवासी) समेत अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर लिया है। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि शासकीय जमीन की रजिस्ट्री आखिरकार पंजीयन कार्यालय में कैसे हो गई।
जांच जारी है और पुलिस जल्द ही संबंधित विभागों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच करेगी। इस घोटाले से प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
