
कवर्धा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले में पुलिस महकमे से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। एसआईबी में पदस्थ प्रधान आरक्षक बहादुर सिंह मरावी पर आरक्षक पद की नौकरी दिलाने के नाम पर तीन गोपनीय सैनिकों से 5-5 लाख रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया गया है। पीड़ित सैनिकों ने सिटी कोतवाली कवर्धा में इसकी लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
क्या हैं आरोप?
- प्रधान आरक्षक बहादुर सिंह मरावी ने कथित रूप से कहा कि वह आरक्षक पद पर नियुक्ति दिला सकता है।
- इसके बदले में प्रत्येक व्यक्ति से 5 लाख रुपए, कुल 15 लाख रुपये लिए गए।
- आरोप है कि मरावी ने फर्जी विभागीय हस्ताक्षरों से युक्त नियुक्ति पत्र थमाए, जो बाद में पूरी तरह फर्जी पाए गए।
पुलिस विभाग में हड़कंप
आरोप सामने आने के बाद पुलिस विभाग में खलबली मच गई है। मामला एक प्रधान आरक्षक जैसे जिम्मेदार पद पर कार्यरत व्यक्ति से जुड़ा होने के कारण नैतिक और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी प्रश्न उठे हैं।
एसपी का बयान
कवर्धा एसपी धर्मेन्द्र छवै ने बताया:
“प्रधान आरक्षक द्वारा नौकरी दिलाने के नाम पर फर्जी नियुक्ति पत्र देने की शिकायत मिली है। प्रथम दृष्टया दस्तावेज फर्जी प्रतीत हो रहे हैं। जांच जारी है, दोष सिद्ध होने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
पीड़ितों की मांग
पीड़ित सैनिकों ने कहा कि उन्होंने विश्वास कर रकम दी थी, लेकिन अब उन्हें न्याय की उम्मीद प्रशासन से है। उन्होंने मांग की कि:
- प्रधान आरक्षक के खिलाफ ठगी और फर्जीवाड़े की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए।
- उनसे वसूले गए रकम की भरपाई कराई जाए।
- अन्य किसी भी पीड़ित की पहचान हेतु विस्तृत जांच हो।
प्रशासनिक प्रश्न जो उठते हैं:
- क्या विभागीय अधिकारी इस घोटाले से अंजान थे?
- इस तरह के फर्जी नियुक्ति पत्र बनाना क्या किसी नेटवर्क का हिस्सा है?
- क्या छत्तीसगढ़ में भर्ती प्रक्रियाएं पारदर्शिता से हो रही हैं?
निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ आर्थिक ठगी नहीं बल्कि पुलिस महकमे की छवि पर सीधा आघात है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह जरूरी है कि उचित कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी तय हो। साथ ही, ऐसे मामलों से यह भी साफ होता है कि भर्ती से जुड़ी पारदर्शिता और निगरानी प्रणाली को और सशक्त करने की आवश्यकता है।



