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छत्तीसगढ़ के 33 में से 15 जिलों के कंट्रोल रुम का टेलीफोन दो-दो साल से बंद, ऐसे हुआ खुलासा…

 रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ पुलिस के बारे में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राज्य में आधे से अधिक जिलों के पुलिस कंट्रोल रुम का टेलीफोन नंबर कई-कई साल से खराब पड़े हैं। लोग 100 डॉयल करते हैं तो फोन लगता नहीं क्योंकि उस नंबर का अस्तित्व समाप्त हो गया है।

डीजीपी अशोक जुनेजा ने 14 नवंबर को पुलिस अधीक्षकों की इमरजेंसी मीटिंग बुलाई थी। चूकि बैठक अचानक आयोजित की गई इसलिए सभी पुलिस अधीक्षकों को इसकी सूचना भेजनी थी। खुफिया विभाग ने इसके लिए सभी जिलों के पुलिस कंट्रोल रुम का नंबर खटखटाया। पुलिस कंट्रोल रुम के जरिये मैसेज करने का मतलब यह था कि मालूम हो जाए कि फोन को प्रॉपर अटेंड किया जा रहा या नहीं।

पुलिस कंट्रोल रुम के नंबर कॉल करने पर 15 से अधिक जिलों के नंबर बंद बताए गए। बाकी जिलों में नंबर लगा भी तो एक कॉल पर नहीं। कई-कई घंटी जाने के बाद फोन रिसीव हुआ। पुलिस कंट्रोल रुम जैसे जगह का टेलीफोन बंद होने के बारे में पीएचक्यू के अधिकारियों ने पता लगाया तो मालूम हुआ कि आज से नहीं बल्कि दो-दो, तीन-तीन साल से नंबर बंद है। कई जगह नीचे के अधिकारियों ने अपने एसपी को भी सूचना देना मुनासिब नहीं समझा।

पीएचक्यू के सूत्रों की मानें तो 15 से अधिक जिलों के पुलिस कंट्रोल रुम के नंबर बंद हैं। इनमें मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, मुंगेली, जांजगीर, खैरागढ़-गंडई, कबीरधाम, बेमेतरा जैसे जिले शामिल हैं।

एसपी की इमरजेंसी बैठक में डीजीपी अशोक जुनेजा इस पर भी नाराज हुए कि पुलिस कंट्रोल रुम का फोन ही काम नहीं करेगा तो लोग कंप्लेन कहां करेंगे। जिन जिलों के कंट्रोल रुम के नंबर बंद है, वहां के एसपी को कहा गया है कि तुरंत टेलीफोन चालू करवाएं।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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