रायपुर,न्यूज़ धमाका :- शरीर के संतुलित विकास के लिए आयोडीन महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। ऐसे में खाद्य पदार्थों में आयोडीन युक्त नमक के सेवन व इसके प्रति जागरूकता लाने सर्वे शुरू किया गया है। इसमें छह से 12 वर्ष तक के स्कूली बच्चों के साथ मितानिनों द्वारा घर-घर जाकर आयोडीन की जांच की जाएगी।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों कहना है :- कि आयोडीन की कमी का सर्वाधिक असर गर्भवती माताओं व शिशुओं पर पड़ता है। गर्भवती माताओं में आयोडीन की कमी से गर्भपात, नवजात शिशु का वजन कम होना, शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होने की समस्याएं सामने आती है।शिशु में आयोडीन की कमी से बौद्धिक और शारीरिक विकास समस्याएं जैसे मस्तिष्क का विकास धीमा होना, शरीर का कम विकसित होना, बौनापन, सुनने और बोलने की समस्या तथा समझ की कमी होती है। ऐसे में इस तरह की बीमारियों व लक्षणों के जांच व उपचार के लिए अभियान चलाया जा रहा है।


