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आज महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि, जानें क्यों गांधी जी को ट्रेन के डिब्बे से बाहर फेंका गया

छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका /// भारत की स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख नायक मोहनदास करमचंद गांधी की नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर हत्या कर दी थी। तब से देश में 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। देश इस साल गांधी जी की 74वीं पुण्यतिथि मना रहा है। महात्मा गांधी ने अपने सकारात्क विचारों से पूरी दूनिया को प्रभावित किया था। महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर पीएम मोदी समेत देश के विभिन्न नेताओं ने उन्हें याद किया है।

गांधी जी सबको एक साथ लेकर चलने पर विश्वास करते थे। गांधी जी ने हमेंशा अपने विचारों पर पहले खुद अमल किया। फिर पूरे विश्व के सामने अपने विचार रखे। लेकिन बहुत कम लोगों को मालूम है कि गांधी जी ने किस वजह से कड़ाके की सर्दी में अफ्रीका के एक रेवले स्टेशन पर रात बिताई थी।

बताया जाता है कि अफ्रीका की डरबन की ए कोर्ट के यूरोपीय मजिस्ट्रेट ने महात्मा गांधी को पगड़ी उतारने के लिए कहा था। लेकिन गांधी जी ने यूरोपीय मजिस्ट्रेट के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था। इसके बाद गांधी ने अदालत से बाहर चले गए। इस घटना के कुछ दिनों के बाद जब गांधी जी ट्रेन से प्रिटोरिया जा रहे थे तब उन्हें रेलवे के प्रथम श्रेणी के डिब्बे से बाहर फेंक दिया गया था। जिस कारण गांधी जी को एक रेलवे स्टेशन पर कड़ाके की सर्दी की रात में स्टेशन पर ठिठुरते हुए रात बितानी पड़ी थी। कहा जाता है कि इसके बाद उसी यात्रा के दौरान गांधी जो ने एक घोड़ागाड़ी के ड्राइवर को पीटा था।

ट्रेन के डिब्बे से बाहर फेंकने की वजह ये थी कि उन्होंने यूरोपीय यात्री को अपनी सीट (जगह) देने से साफ मना कर दिया था। क्योंकि, गांधी जी ऐसा करते तो उन्हें पायदान पर बैठना पड़ता जो कि उन्हें कभी मंजूर नहीं था। आखिर में उन्हें उस होटल में जाने से भी मना कर दिया गया जो कि सिर्फ यूरोपीय लोगों के लिए ही था। नटाल में भारतीय व्यापारी इसी तरह बेइज्जत हुआ करते थे और उन इसकी आदत हो गई थी। लेकिन जो लोग नए थे उनके लिए ये बहुत बड़ी बेइज्जती का विषय था। गांधी जी तो खुद स्वाभिमानी थे और पराए देश में इस तरह का अपमान उनके लिए असहनीय था। लेकिन इस अपमान ने गांधी जी के जीवन में कुछ बदलाव भी लाए थे।

हर वर्ष देश में 30 जनवरी को शहीद दिवस मनाया जाता है। इस दिन देश के राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और तीनों सेना के प्रमुख राजघाट स्थित महात्मा गांधी की समाधि पर उन्हें श्रद्धांजलि देते हैं। सेना के जवान भी इस मौके पर गांधी जो को श्रद्धांजलि देने के लिए अपने हथियार को नीचे छुकाते हैं। इसे सेना की भाषा में सम्मान देना कहते हैं। इस दिन पूरे देश में महात्मा गांधी के साथ-साथ अन्य शहीदों को भी याद किया जाता है और उनकी याद में 2 मिनट का मौन भी रखा जाता है। गांधी जी सभी धर्मों को एक जैसा मानते थे। उनको सम्मान देने के लिए सभी धर्म के लोग प्रार्थना करते हैं।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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