
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री पद को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि कोई भी व्यक्ति यह नहीं कहेगा कि उसे मुख्यमंत्री नहीं बनना है। सिंहदेव ने कहा,
“मैं कभी नहीं कहूंगा कि मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना है। ऐसा कौन कहेगा कि वह मुख्यमंत्री नहीं बनना चाहता। पहले भी मेरा नाम चला था। ढाई-ढाई साल के मुद्दे पर मीडिया ने लगातार मुझे बनाए रखा। लेकिन पार्टी का निर्णय ही अंतिम होता है।”
“पार्टी का फैसला सर्वोपरि”
टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि उन्होंने हमेशा पार्टी के निर्णय को सर्वोच्च माना है।
“मेरे लिए पार्टी का निर्णय ही अंतिम निर्णय है। पहले भी जब चर्चा हुई, मैंने वही कहा था और आज भी वही कह रहा हूं,” उन्होंने जोड़ा।
सिंहदेव का यह बयान ऐसे समय आया है जब छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर नेतृत्व को लेकर चर्चाएं तेज हैं।
“अगला चुनाव कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी”
अगले विधानसभा चुनाव को लेकर पूछे गए सवाल पर टी.एस. सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस आगामी चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी।
उन्होंने कहा,
“कांग्रेस का अगला विधानसभा चुनाव सामूहिक नेतृत्व में लड़ा जाएगा। हमारे सभी वरिष्ठ नेता एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेंगे।”
सिंहदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस का नेतृत्व पार्टी हाईकमान के मार्गदर्शन में तय होगा।
CJI पर जूता फेंकने की घटना पर प्रतिक्रिया
सिंहदेव ने हाल ही में CJI (मुख्य न्यायाधीश) पर जूता फेंकने की घटना की भी निंदा की। उन्होंने कहा कि यह किसी एक समाज या वर्ग से जुड़ा मुद्दा नहीं है, बल्कि संविधान और संवैधानिक पदों का अपमान है।
“सर्वोच्च संवैधानिक स्थान पर बैठे व्यक्ति का अनादर करेंगे तो यह पूरे संवैधानिक तंत्र का अनादर है,” उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे जोड़ा कि देश की राजनीति धर्म और जाति के आधार पर विभाजित हो गई है, जिससे समाज में तनाव और वैमनस्य फैल रहा है।
“मैं हिंदू हूं, लेकिन कांग्रेस मेरा धर्म है”
धर्म और राजनीति के मुद्दे पर बोलते हुए सिंहदेव ने कहा,
“आप राजनीतिक लाभ के लिए समाज को विभाजित करना चाहते हैं। वोट की राजनीति में हिंदू धर्म को बहुसंख्यक मान लिया गया है। लेकिन सारे हिंदू भाजपाई कैसे हो सकते हैं? मैं भी हिंदू हूं, लेकिन मैं पैदा हुआ कांग्रेसी और मरूंगा भी कांग्रेसी।”
पृष्ठभूमि
ज्ञात हो कि 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद ‘ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले’ को लेकर टी.एस. सिंहदेव और तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बीच सत्ता साझेदारी को लेकर चर्चा तेज रही थी। हालांकि, सिंहदेव ने हर बार कहा था कि वे पार्टी के फैसले को ही अंतिम मानते हैं।
