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पत्नी की आत्महत्या मामले में पति दोषमुक्त : हाईकोर्ट ने किया बरी, ट्रायल कोर्ट ने दी थी पांच साल की सजा

बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पत्नी की आत्महत्या के मामले में पति को दोषमुक्त कर दिया है। न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने निचली अदालत द्वारा दी गई सजा को निरस्त करते हुए कहा कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में असफल रहा कि आरोपी ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया या उसके साथ ऐसी क्रूरता की, जिससे वह यह कदम उठाने को मजबूर हुई।

पूरा मामला धमतरी जिले के सिहावा थाना क्षेत्र का है। आरोपी पवन प्रजापति की पत्नी बसंती बाई की 6 दिसंबर 2019 को घर में आग लगने से मृत्यु हो गई थी। पवन ने खुद पुलिस को सूचना दी थी कि उसकी पत्नी जल गई है।


जांच में मिले सबूत

पुलिस ने मौके से जले हुए कपड़े, टायर के टुकड़े, माचिस, मिट्टी तेल की बोतल और अन्य सामान जब्त किया था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने बताया कि मृतका के शरीर के महत्वपूर्ण अंग 3 से 4 डिग्री तक जले थे, और मौत का कारण जलने से दम घुटना बताया गया।


ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी सजा

मर्ग जांच के बाद पुलिस ने पवन प्रजापति के खिलाफ धारा 306 (आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरण) और धारा 498-ए (पत्नी के प्रति क्रूरता) के तहत मामला दर्ज किया था।
आरोप था कि पवन शराब पीकर पत्नी से मारपीट करता था और यह कहकर ताना मारता था कि वह केवल बेटियां ही जन्म देती है।

दिसंबर 2021 में ट्रायल कोर्ट ने उसे दोषी पाते हुए

  • धारा 306 के तहत 5 साल की सजा
  • और धारा 498A के तहत 1 साल की सजा सुनाई थी।

हाईकोर्ट में आरोपी की दलील

हाईकोर्ट में आरोपी के वकील डी.एन. प्रजापति ने कहा कि अभियोजन पक्ष केवल यह साबित कर सका कि पति-पत्नी में कभी-कभी झगड़े होते थे, पर ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है कि आरोपी ने जानबूझकर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाया।

उन्होंने यह भी कहा कि मृतका ने कभी पुलिस में शिकायत नहीं की थी, न ही बेटियों या परिजनों ने किसी गंभीर हिंसा की बात कही।

वहीं, राज्य की ओर से पैनल लॉयर ने कहा कि पवन का व्यवहार क्रूर था और उसी के कारण बसंती मानसिक रूप से परेशान रहती थी।


साक्ष्यों से नहीं मिली स्पष्ट पुष्टि

हाईकोर्ट ने गवाहों के बयानों और साक्ष्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि —

  • मृतका की दोनों बेटियों और भाभी ने बताया कि दंपती में झगड़े नहीं होते थे।
  • मृतका के भाइयों ने कहा कि कभी-कभी शराब पीने के बाद पवन झगड़ा करता था, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि ऐसा कितनी बार या कितनी गंभीरता से हुआ।
  • पड़ोसी या स्वतंत्र गवाह को अभियोजन ने पेश नहीं किया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि समाज की बैठक में आरोपी द्वारा पत्नी को न सताने का वादा करना एक सामान्य पारिवारिक विवाद था, इसे “क्रूरता” की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।


कोर्ट की टिप्पणी

न्यायमूर्ति नरेश कुमार चंद्रवंशी ने अपने फैसले में कहा —

“केवल कभी-कभी शराब पीना और झगड़ा करना ‘क्रूरता’ या ‘आत्महत्या के लिए उकसाने’ की श्रेणी में नहीं आता। अभियोजन पक्ष ठोस साक्ष्य पेश करने में असफल रहा है।”

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल सामान्य आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।


अंतिम फैसला

इस आधार पर हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का निर्णय रद्द कर दिया और आरोपी पवन प्रजापति को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

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Chhattisgarh News Dhamaka Team

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