
सुकमा न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले से तेलंगाना में मजदूरी करने गए एक आदिवासी युवक को आम बगीचे के मालिक ने झूठे आरोप में 15 दिनों तक बंधक बनाकर रखा। लेकिन कांग्रेस नेता दुर्गेश राय की पहल से युवक को आज़ाद कराया गया। इस घटना ने प्रवासी मजदूरों की स्थिति, उनके शोषण और अधिकारों की अनदेखी पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।
6 महीने तक बग़ैर वेतन काम, फिर चोरी का आरोप
ग्राम भंडारास (पंचायत कुकनार, सुकमा) निवासी ईश्वर नाम का आदिवासी युवक छह महीने पहले रोजगार की तलाश में तेलंगाना के पाटनचेरू (मेड़चल मलकाजगिरी जिला) स्थित एक आम बागान में काम करने गया था।
बागान मालिक श्रीनिवास ने प्रति माह ₹12,000 वेतन का वादा किया था। छह महीने बीत गए, लेकिन न तो वेतन दिया गया, न ही मजदूरों को घर लौटने दिया गया। आम का सीजन खत्म होते ही श्रीनिवास ने ईश्वर सहित 10 मजदूरों पर चोरी का झूठा आरोप लगाया, और सभी को काम से निकाल दिया।
ईश्वर को बनाया बंधक, 3 लाख की फिरौती की मांग
बाकी 9 मजदूरों को छोड़ा गया, लेकिन ईश्वर को बंधक बना लिया गया। श्रीनिवास ने ईश्वर के परिवार को फोन कर कहा –
“3 लाख रुपये लाओ, तभी ईश्वर को छोड़ा जाएगा।”
यह सुनकर मजदूरी पर निर्भर परिवार टूट गया। कोई चारा न देख, उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता वीरसिंह मांझी से संपर्क किया।
कांग्रेस नेता दुर्गेश राय ने निभाई मसीहा की भूमिका
वीरसिंह मांझी ने यह बात कांग्रेस प्रदेश सचिव व वरिष्ठ नेता दुर्गेश राय तक पहुंचाई।
राय ने तत्काल तेलंगाना कांग्रेस नेताओं से संपर्क किया, और पूरा मामला युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव संतोष को बताया।
सीधे बागान मालिक श्रीनिवास से संपर्क कर दबाव बनाया गया, जिसके बाद उसने ईश्वर को छोड़ दिया।
परिजनों के सुपुर्द हुआ ईश्वर, गांव में खुशी का माहौल
ईश्वर को छुड़ाकर सुकमा लाया गया और उसके भाई को सौंपा गया। घर लौटते ही ईश्वर की आंखों में आंसू और चेहरों पर राहत थी।
गांव में लोग कांग्रेस नेता दुर्गेश राय का आभार व्यक्त कर रहे हैं, जिन्होंने बिना किसी देरी के आदिवासी युवक को इंसाफ दिलाया।
“ऐसा अत्याचार आदिवासियों के साथ नहीं होना चाहिए” – दुर्गेश राय
इस पूरे प्रकरण पर राय ने कहा:
“कांग्रेस पार्टी का स्पष्ट मत है कि आदिवासियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। मैंने अपनी पार्टी की नीति के अनुरूप ईश्वर की मदद की। ऐसे मामलों में सरकार और प्रशासन को भी तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।”
अब सवाल ये हैं…
- क्या बंधक बनाने और वेतन न देने के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी?
- क्या श्रीनिवास जैसे मालिकों पर बंधुआ मज़दूरी और मानवाधिकार हनन का केस दर्ज होगा?
- प्रवासी मजदूरों के लिए सुरक्षा नीति और तंत्र कब मजबूत होंगे?
निष्कर्ष
ईश्वर की रिहाई एक अच्छी खबर जरूर है, लेकिन यह देशभर में प्रवासी आदिवासी मजदूरों के शोषण की एक भयावह सच्चाई को सामने लाती है। ऐसे मामलों में केवल सामाजिक या राजनीतिक प्रयास ही नहीं, स्थायी कानूनी समाधान और निगरानी तंत्र की जरूरत है।



