
बाल दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों को प्रशासनिक कामकाज की जानकारी देने दो दिन के लिए जिम्मेदारी दी गई। गुरुवार की शाम को उन्होंने अनुभव साझा करते हुए अफसर बनने की बात कही। इस अवसर पर कलेक्टर नम्रता गांधी ने कहा कामयाबी के लिए मेहनत और ईमानदारी के साथ-साथ समय प्रबंधन जरूरी है। उहोंने सभी बाल प्रशासकों को प्रमाण पत्र एवं पुरस्कार दी।
जिला प्रशासन और यूनिसेफ के सहयोग से बाल दिवस सप्ताह के दौरान जिले के 40 बाल प्रशासकों ने जिला और विकासखंड स्तर पर अधिकारी के रूप में अलग-अलग विभागों के कामकाज की प्रक्रिया से रूबरू हुए। बाल प्रशासकों ने 17 एवं 18 नवंबर को कलेक्टर, पुलिस, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जिला पंचायत,वन, कृषि, शिक्षा सहित विभिन्न् जिला अधिकारियों से सम्बद्ध होकर उनके कामकाज की प्रक्रिया को देखने और समझने के साथ ही विभिनन योजनाओं, विकास कार्यों एवं स्थलों का मौका मुआयना भी किया।
बाल प्रशासकों और विभागीय अधिकारियों ने गुरुवार शाम परियोजना प्रशासक कार्यालय के सभाकक्ष में सामूहिक रूप से अपने अपने अनुभव साझा किए। बाल प्रशासकों ने कहा कि उन्हें अलग-अलग विभागों की कार्यप्रणाली जानने और देखने का अवसर मिला। उन्होंने जिला प्रशासन और यूनिसेफ की इस व्यवस्था की सराहना की। बधाों ने बताया इस व्यवस्था से वे काफी प्रभावित हुए हैं। उन्हें आगे बढ;ने की प्रेरणा मिली है। उनका आत्मविश्वास बढ;ा है। वे भी भविष्य में अधिकारी बनकर ईमानदारी से जन सेवा के कार्य करेंगे। बधाों ने अपने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें गोधन न्याय योजना के तहत गोठनों में महिला स्व सहायता समूह द्वारा किए जा रहे विभिन्न् गतिविधियों की जानकारी मिली। धान खरीदी व्यवस्था देखने मिला। पुल निर्माण, पेंशन, नामांतरण, बंटवारा आदि की जानकारी मिली। बाल प्रशासकों ने सवाल जवाब भी किया। संबद्ध अधिकारियों ने उनके शंकाओं का समाधान भी किया। इस अवसर पर बधाों ने प्रश्न किया कि कलेक्टर बनने के लिए क्या करना पड़ता है, कलेक्टर कैसे बनते हैं। इस सवाल का जवाब कलेक्टर गांधी ने मुस्कुराहट के साथ आत्मीयता से बधाों को बताया कि इसके लिए मेहनत और ईमानदारी के साथ-साथ समय प्रबंधन जरूरी है।
उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष भी जरूरी है। आगे बढ़ने के लिए ठोकरें भी लगती है, इससे घबराना नहीं चाहिए। अपना ध्यान केंद्रित करके आगे बढ;ना चाहिए। मन लगाकर पढ़ाई करना चाहिए। लक्ष्य निश्चय कर लेने के बाद बीच में छोड़ना नहीं चाहिए।
कलेक्टर ने कहा कि जीवन में अनुशासन और आत्मविश्वास जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनौतियों को अवसर समझ कर आगे बढ़ते रहना चाहिए। कलेक्टर और संबद्ध अधिकारियों ने सभी बाल प्रशासकों को प्रमाण पत्र और पुरस्कार भी प्रदान किए। इस अवसर पर एसडीएम अपूर्व टोप्पो एवं पुष्पेंद्र शर्मा, डिप्टी कलेक्टर हितेश्वरी बाघे, जिला शिक्षा अधिकारी मनोज राय, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी देवेंद्र पैकरा सहित अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे
