
बिलासपुर न्यूज़ धमाका – कोरबा जिले के देवपहरी में विशेष जनजाति की 16 वर्षीय पहाड़ी कोरवा नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म और उसके बाद उसके पिता और 4 वर्षीय नातिन की हत्या के दिल दहला देने वाले मामले में आज एक बड़ा मोड़ आया है। बिलासपुर हाईकोर्ट ने सत्र न्यायालय द्वारा पांच आरोपियों को सुनाई गई फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया है।
घटना का पृष्ठभूमि:
यह सनसनीखेज मामला जनवरी 2021 का है, जब देवपहरी गांव में रहने वाली कोरवा जनजाति की एक लड़की के साथ पहले गैंगरेप किया गया और फिर उसके सामने ही पिता और बच्ची को बेरहमी से मार डाला गया। आरोपी संतराम मंझवार, पीड़ित परिवार के मुखिया से मवेशी चराने का काम करवाता था। जब पीड़ित परिवार ने बकाया मेहनताना मांगा तो पहले उन्हें थोड़ी रकम देकर टाल दिया गया। बाद में उन्हें घर छोड़ने के बहाने बुलाया गया और इस अमानवीय घटना को अंजाम दिया गया।
कैसे सामने आया पूरा मामला:
पीड़िता की मां ने बताया कि आरोपी संतराम और उसके साथी बाइक से उन्हें अलग-अलग ले गए। महिला को पहले ही भेज दिया गया और उसके पति, बेटी और नातिन को रोक लिया गया। अगले दिन जंगल में तीनों के शव मिले। जांच में पता चला कि लड़की से गैंगरेप करने के बाद विरोध करने पर उसके पिता की हत्या कर दी गई, और बाद में बेटी और नातिन की भी हत्या कर दी गई।
विशेष न्यायालय का फैसला:
इस मामले की सुनवाई पॉक्सो कोर्ट की विशेष न्यायाधीश डॉ. ममता भोजवानी द्वारा की गई थी। उन्होंने इसे “पाशविक, वीभत्स और कायरतापूर्ण कृत्य” बताते हुए पांच आरोपियों – संतराम मंझवार, अनिल सारथी, आनंद दास, परदेशी दास और जब्बार उर्फ विक्की को फांसी की सजा सुनाई थी। जबकि एक अन्य आरोपी उमाशंकर यादव को उम्रकैद की सजा दी गई थी।
हाईकोर्ट का फैसला:
फांसी की सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट भेजा गया था, जहां मुख्य न्यायाधीश रमेश कुमार सिन्हा और न्यायमूर्ति बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने कहा कि,
“घटना अवश्य ही समाज को झकझोरने वाली है, लेकिन यह मामला रेयरेस्ट ऑफ रेयर की श्रेणी में नहीं आता। आरोपियों की आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं है, और उनकी उम्र को देखते हुए मृत्युदंड उचित नहीं है।”
अब आगे क्या?
इस फैसले के बाद पूरे प्रदेश में मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे न्याय की नरमी बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे कानूनी प्रक्रिया की मजबूरी मान रहे हैं। पीड़िता का परिवार न्याय के इस फैसले से नाखुश बताया जा रहा है और वे शीघ्र सर्वोच्च न्यायालय में अपील करने की बात कर रहे हैं।



