
रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में आज कर्मचारी-अधिकारी वर्ग ने एकजुट होकर केंद्र सरकार की ‘मोदी की गारंटी’ को लागू कराने तथा राज्य सरकार से लंबित मांगों के निराकरण हेतु बड़ा आंदोलन किया। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर यह प्रदर्शन राज्य के सभी जिला मुख्यालयों और ब्लॉकों में एक साथ आयोजित किए गए।
रायपुर से शुरू हुआ पहला चरण, राज्यभर में फैला आंदोलन
राजधानी रायपुर स्थित इंद्रावती भवन के गेट नंबर 3 से प्रथम चरण की शुरुआत हुई। यहां से रैली निकालकर प्रदर्शन किया गया, जिसमें सैकड़ों की संख्या में अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। पूरे राज्य में यह प्रदर्शन सांकेतिक हड़ताल के रूप में किया गया।
फेडरेशन ने यह स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक स्वरूप में आयोजित है।
प्रमुख 11 सूत्रीय मांगें:
- केंद्र सरकार की तर्ज पर महंगाई भत्ता (DA) लागू किया जाए।
- DA एरियर्स की राशि कर्मचारियों के GPF में समायोजित की जाए।
- सभी कर्मचारियों को चार स्तरीय समयमान वेतनमान दिया जाए।
- पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक कर वेतन विसंगतियाँ दूर की जाएँ।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली की जाए।
- सहायक शिक्षकों और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को तृतीय समयमान वेतनमान मिले।
- अनुकंपा नियुक्तियों में 10% की सीमा में शिथिलीकरण किया जाए।
- प्रदेश में स्वास्थ्य संबंधी कैशलेस सुविधा लागू की जाए।
- अर्जित अवकाश की नगदीकरण सीमा 300 दिवस तक बढ़ाई जाए।
- दैनिक/संविदा/अनियमित कर्मचारियों के लिए नियमितीकरण नीति बने।
- सेवानिवृत्त आयु 65 वर्ष की जाए और सभी विभागों में समानता हो।
फेडरेशन को पेंशनर्स संगठनों का समर्थन
इस आंदोलन को छत्तीसगढ़ के विभिन्न पेंशनर्स संगठनों ने भी पूर्ण समर्थन देते हुए आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की घोषणा की है। यह गठबंधन अब सभी कर्मचारी वर्गों की एकता का प्रतिनिधित्व करता है।
प्रमुख नेताओं की अगुआई
इस ऐतिहासिक आंदोलन में शामिल रहे फेडरेशन के प्रमुख पदाधिकारी:
कमल वर्मा, जी.आर. चंद्रा, चंद्रशेखर तिवारी, बी.पी. शर्मा, मनीष मिश्रा, राकेश शर्मा, ऋतु परिहार, नागेश्वर मौर्य, हरिमोहन सिंह सहित अनेक जिला और ब्लॉक संयोजकों ने अपने क्षेत्रों में आंदोलन का नेतृत्व किया।
फेडरेशन का संदेश: “अपने हक की आवाज बुलंद करें”
फेडरेशन ने समस्त संगठनों और कर्मचारियों से इस आंदोलन को सफल बनाने की अपील करते हुए कहा:
“यह आंदोलन हमारी सेवाओं के सम्मान और हमारे हकों की पुनः प्राप्ति के लिए है। इसे शांतिपूर्ण ढंग से लड़कर सफल बनाना ही प्रत्येक कर्मचारी की जिम्मेदारी है।”
निष्कर्ष:
“मोदी की गारंटी लागू करो” अभियान छत्तीसगढ़ में एक संगठित, अनुशासित और लोकतांत्रिक जनप्रदर्शन का उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यदि सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं हुई, तो फेडरेशन आंदोलन के अगले चरण की घोषणा कर सकता है।



