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सरकारी दफ्तरों में शेयर ट्रेडिंग का जाल! अफसरों की नजर फाइलों पर नहीं, स्टॉक्स पर

रायपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों में अब कामकाज से ज्यादा चर्चा शेयर मार्केट, क्रिप्टो करेंसी और नेटवर्क मार्केटिंग की हो रही है। दफ्तरों में लगे कंप्यूटरों पर जहां फाइलें खुली होनी चाहिए, वहां अब स्टॉक्स के उतार-चढ़ाव पर निगाहें टिकी हैं। सरकारी इंटरनेट और वाई-फाई का दुरुपयोग कर अधिकारी-कर्मचारी दफ्तर समय में इंट्राडे ट्रेडिंग और डिजिटल निवेश में लिप्त हैं।


शिकायतों के बाद सरकार सख्त, जारी की अधिसूचना

राज्य सरकार को पिछले कुछ समय से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई विभागों में अधिकारी और कर्मचारी सरकारी संसाधनों का निजी निवेश गतिविधियों में दुरुपयोग कर रहे हैं। जांच के बाद सरकार ने राजपत्र अधिसूचना जारी कर दी है, जिसमें अब:

  • इंट्राडे ट्रेडिंग,
  • BTST (Buy Today, Sell Tomorrow),
  • फ्यूचर एंड ऑप्शंस
  • तथा क्रिप्टोकरेंसी में सरकारी कर्मचारियों के निवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

हालांकि, उन्हें लॉन्ग टर्म निवेश जैसे शेयर, म्यूचुअल फंड और डिबेंचर्स में निवेश की अनुमति दी गई है।


सरकारी कंप्यूटर से ट्रेडिंग: एक चिंताजनक ट्रेंड

यह पहली बार नहीं है जब सरकारी सेवकों द्वारा ट्रेडिंग को लेकर सवाल उठे हैं। मध्य प्रदेश के चर्चित आईएएस दंपत्ति अरविंद और टीनू जोशी का मामला अब तक मिसाल के तौर पर याद किया जाता है, जिनके पास से करोड़ों रुपये की संपत्ति और नकद बरामद हुआ था। वे दफ्तर से ही रोजाना इंट्राडे ट्रेडिंग किया करते थे।


शेयर बाजार का समय और दफ्तर का समय एक जैसा

इंट्राडे ट्रेडिंग सुबह 9:30 से दोपहर 3:30 बजे तक होती है — जो कि सरकारी कार्यालयों के समय से पूरी तरह मेल खाता है। ऐसे में यदि अधिकारी और कर्मचारी इसी समय शेयर मार्केट में व्यस्त रहेंगे तो जनहित के कार्यों में बाधा आना स्वाभाविक है।


सरकारी इंटरनेट से क्रिप्टो और शेयर ट्रेडिंग, बनेगा सॉफ्टवेयर मॉड्यूल

अब सरकार की योजना है कि सरकारी कंप्यूटरों और इंटरनेट नेटवर्क में ऐसी वेबसाइट्स जैसे:

  • NSE/BSE लाइव ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म,
  • Zerodha, Groww, Upstox जैसी ब्रोकिंग वेबसाइट्स,
  • क्रिप्टो प्लेटफॉर्म जैसे Binance, CoinDCX इत्यादि

ब्लॉक कर दिए जाएं, जिससे सरकारी संसाधनों से निजी निवेश संभव न हो सके।


गुरुजी भी नहीं पीछे: स्कूलों से नेटवर्क मार्केटिंग तक

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण स्कूलों में पदस्थ कुछ शिक्षक भी अब “मालिक माइंडसेट” अपनाकर शिक्षा छोड़कर नेटवर्क मार्केटिंग में रम गए हैं। कुछ शिक्षक तो इस्तीफे में स्कूल को “चिड़ियाघर” तक लिखने से नहीं हिचकिचाए। सरकार ने ऐसे मामलों पर सख्ती दिखाते हुए सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (DEOs) से रिपोर्ट मांगी है।


निष्कर्ष:

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी दफ्तरों को निवेश हब नहीं बनने दिया जाएगा। “काम के समय, केवल काम” की नीति को सख्ती से लागू किया जाएगा। संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए तकनीकी समाधान के साथ-साथ निगरानी भी बढ़ाई जाएगी।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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