
बिलासपुर न्यूज धमाका – छत्तीसगढ़ में लेक्चरर से प्राचार्य पद पर पदोन्नति को लेकर चल रही न्यायिक प्रक्रिया अब निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है। बिलासपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में आज भी मामले की सुनवाई हुई, जहां राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने पक्ष रखा। वहीं, प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से पेश अधिवक्ताओं को भी कोर्ट ने स्पष्ट सवालों के जरिए चुनौती दी।
क्या है मामला?
- राज्य में प्राचार्य पदोन्नति प्रक्रिया को लेकर बीते कुछ वर्षों से कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं।
- मुख्य विवादों में बीएड/डीएलएड योग्यता, प्रधानपाठक से व्याख्याता बने शिक्षकों की वरिष्ठता, और शासन द्वारा अपनाए गए मापदंड शामिल हैं।
- याचिकाकर्ता चाहते हैं कि प्रमोशन प्रक्रिया शासन द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुरूप हो, जिसमें बीएड को अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता माना जाए।
आज की सुनवाई का सारांश
- कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं से यह स्पष्ट करने को कहा कि उन्होंने शासन के मापदंडों को चुनौती दी है या समर्थन किया है।
- अधिवक्ताओं ने कोर्ट को अवगत कराया कि याचिकाएं शासन के नियमों के अनुरूप पदोन्नति प्रक्रिया लागू करने की मांग पर आधारित हैं।
- सोमवार को दो नई याचिकाएं और दायर हुईं, जिन्हें पूर्व याचिकाओं के साथ मर्ज कर लिया गया है।
कल होगी हस्तक्षेप याचिकाओं पर बहस
- मंगलवार को कोर्ट हस्तक्षेप याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनेगा।
- इनकी ओर से अधिवक्ता अपनी पक्षदर्शिता प्रस्तुत करेंगे।
- प्राचार्य पदोन्नति फोरम की ओर से आकाश राय, विकास नायक, एस.के. चिंचालकर, व टीचर्स एसोसिएशन से मनोज सनाढ्य, चंद्रशेखर गुप्ता कोर्ट में मौजूद रहे।
11 जून से चल रही है लगातार सुनवाई
- 11 जून 2025 से इस मामले की सुनवाई डिवीजन बेंच में प्रतिदिन हो रही है।
- शुक्रवार को याचिकाकर्ता पक्ष ने अपनी बहस पूरी की।
- कोर्ट ने राज्य शासन से पूछा कि हाई कोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद शिक्षकों को ज्वाइनिंग क्यों दी गई। कोर्ट ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई थी और अस्थायी रूप से ज्वाइनिंग को अमान्य कर दिया।
इन शिक्षकों ने दायर की याचिकाएं
- पी. गलिक राव
- लक्ष्मी प्रसाद रबेठ
- दूज राम खरे
- संजय कुमार वखारिया
- रुपनारायण कुशवाहा
- अनुराग त्रिवेदी
- अखिलेश त्रिपाठी
- आनंद प्रसाद साहू
- कोमल प्रसाद साहू
- पुरुषोत्तम सिंह यदु
इनके साथ कई अन्य ने भी हस्तक्षेप याचिकाएं लगाई हैं।
प्रमुख बिंदु:
| विषय | स्थिति |
|---|---|
| याचिका संख्या | 6+ मूल, 2 नई मर्ज |
| मुख्य मुद्दा | बीएड अनिवार्यता, वरिष्ठता विवाद |
| याचिकाकर्ता की मांग | शासन मापदंडों के अनुरूप प्रमोशन |
| राज्य शासन का पक्ष | अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा प्रस्तुत |
| अगली सुनवाई | मंगलवार, 17 जून 2025 |
निष्कर्ष
यह मामला केवल शिक्षकों की पदोन्नति तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य में शैक्षणिक प्रशासनिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और योग्यता आधारित प्रणाली की परीक्षा बन चुका है। अब अदालत के अगले निर्देश का शिक्षकों, प्रशासन और पूरे शिक्षा क्षेत्र को इंतजार है।



