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तालाब में डूबकर चार बच्चों की मौत, हाईकोर्ट सख्त – चीफ सिकरेट्री से मांगा जवाब

बिलासपुर न्यूज धमाका – बच्चों की सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट गंभीर हो गया है। जांजगीर में तालाब में डूबने से चार बच्चों की मौत और कांकेर में नाले को पार कर स्कूल जाने की मजबूरी वाले मामलों पर कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका (PIL) के रूप में सुनवाई प्रारंभ की है।

बिलासपुर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को नोटिस जारी कर शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 जुलाई 2025 की तारीख तय की है।


क्या है मामला?

पहली घटना – तालाब में डूबे चार मासूम (जांजगीर)

भैंसतरा गांव के चार स्कूली बच्चे खेलते-खेलते तालाब में नहाने उतर गए और डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने बच्चों को तालाब से निकालने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

दूसरी घटना – खतरे में शिक्षा (कांकेर)

केसलपारा गांव के स्कूली बच्चे कमर तक गहरे और खतरनाक नाले को पार कर रोजाना स्कूल जाते हैं। बारिश के दौरान यह और भी जानलेवा हो जाता है। गांव में सिर्फ प्राइमरी स्कूल है, मिडिल स्कूल के लिए बच्चों को दूर कनागांव जाना पड़ता है। ग्रामीण कई बार पुल की मांग कर चुके हैं, लेकिन केवल आश्वासन ही मिले हैं, कोई ठोस कदम नहीं।


हाईकोर्ट की टिप्पणी:

“सरकार भले ही इन घटनाओं के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार न हो, लेकिन बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है।”
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा

कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि:

  • स्कूलों के आसपास मौजूद तालाब, नाले, पुलिया और अन्य खतरनाक स्थलों की पहचान की जाए।
  • तत्काल सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।
  • भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्थायी समाधान की कार्ययोजना बनाई जाए।

जनहित याचिका की प्रक्रिया:

  • कोर्ट ने इस पूरे मामले को PIL में तब्दील किया।
  • मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर शपथपत्र सहित जवाब पेश करने का आदेश।
  • अगली सुनवाई: 29 जुलाई 2025।

जनभावना और प्रतिक्रिया:

इस घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया है। जहां एक ओर शिक्षा के अधिकार की बात होती है, वहीं बच्चे आज भी अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल पहुंच रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर सरकार समय रहते पुल या सुरक्षा इंतजाम करती, तो ऐसी घटनाएं टाली जा सकती थीं।


निष्कर्ष:
बिलासपुर हाईकोर्ट की इस सख्ती से उम्मीद की जा रही है कि राज्य सरकार बच्चों की सुरक्षा और आधारभूत संरचना को लेकर गंभीरता से कदम उठाएगी। यह फैसला अन्य जिलों के लिए भी सतर्कता का संदेश है।

Chhattisgarh News Dhamaka Team

अमन चीफ एडिटर - छत्तीसगढ़ न्यूज़ धमाका // प्रदेश उपाध्यक्ष, छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन छत्तीसगढ // ; हरिभूमि ब्यूरो चीफ जिला कोंडागांव // 18 सालो से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय। विश्वसनीय, सृजनात्मक व सकारात्मक पत्रकारिता में विशेष रूचि। कृषि, वन, शिक्षा; जन जागरूकता के क्षेत्र की खबरों को हमेशा प्राथमिकता। जनहित के समाचारों के लिये तत्परता व् समर्पण// जरूरतमंद अनजाने की भी मदद कर देना पहली प्राथमिकता

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