
सीतापुर न्यूज धमाका – ज़िले में एक पटवारी के खिलाफ बिना विभागीय अनुमति के दर्ज एफआईआर को लेकर पटवारी संघ ने एसडीएम नीरज कौशिक को ज्ञापन सौंपा। संघ ने तत्कालीन थाना प्रभारी प्रदीप जायसवाल और उप पंजीयक अर्चना जायसवाल पर कार्यवाही की मांग की है, साथ ही चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन किया जाएगा।
क्या है मामला?
ग्राम पेटला के भूस्वामी खीरु आचेंगा की 2.705 एकड़ भूमि को फर्जी तरीके से खीरु आरांगा के नाम से रजिस्ट्री करा दी गई। इस फर्जीवाड़े में जरूरी दस्तावेजों के अभाव के बावजूद उप पंजीयक ने रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर दी।
जब मामला खुला, तो भूस्वामी ने थाने में रिपोर्ट की, जिसके आधार पर पुलिस ने फर्जी विक्रेता, क्रेता, दो गवाहों और पेटला के पटवारी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया। लेकिन उप पंजीयक को बरी कर दिया गया, जिससे विवाद खड़ा हो गया।
पटवारी संघ का पक्ष
पटवारी संघ का कहना है कि:
- शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी पटवारी पर मुकदमा दर्ज करने से पहले विभाग प्रमुख की अनुमति अनिवार्य है।
- थाना प्रभारी ने इस निर्देश की अवहेलना करते हुए मनमाने ढंग से कार्रवाई की।
- उप पंजीयक को बिना किसी कार्रवाई के बरी कर देना दर्शाता है कि थाना प्रभारी ने पक्षपात किया और एकतरफा कार्यवाही की।
संघ ने चेताया
पटवारी संघ ने ज्ञापन में कहा:
“अगर इस मामले में थाना प्रभारी और उप पंजीयक के विरुद्ध शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो संघ राज्यव्यापी आंदोलन करने को बाध्य होगा।”
ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रमुख प्रतिनिधि
- विनोद अग्रवाल (अध्यक्ष, पटवारी संघ)
- हरिश्चंद्र सोनी, गोपाल सोनी, मनोज सिंह
- बालेश्वर सिंह, फैयाज अंसारी, जितेंद्र पैंकरा, अनिरुद्ध पैंकरा
प्रशासन पर सवाल
अब प्रशासन और पुलिस पर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह दोहरा रवैया भ्रष्टाचार को बढ़ावा नहीं देता?
क्या वाकई नियमों की अनदेखी करके पटवारी को बलि का बकरा बनाया गया, जबकि मुख्य जिम्मेदार उप पंजीयक को बचा लिया गया?
📌 निष्कर्ष:
यह मामला सिर्फ एक भूमि विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, न्यायिक प्रक्रिया, और शासन के नियमों की गंभीरता से जुड़ा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी निष्पक्षता से कार्रवाई करता है।



